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जानिए, निवेश करते समय बरतें किस तरह की सावधानियां

Fri, 23 Oct 2020 05:40 AM IST
नारायण कृष्णमूर्ति नारायण कृष्णमूर्ति
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गिरती ब्याज दरों ने बैंकों में बचत का आकर्षण कम कर दिया है। एक सार्वजनिक उपक्रम में इंजीनियर विक्रम सिंह (46) को पिछले छह महीने के दौरान अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करने का मौका मिला, तो उन्होंने पाया कि उनकी बचत से अब कम रिटर्न मिल रहा है। अपने वित्तीय भविष्य को लेकर उनका चिंतित होना स्वाभाविक है। वह जानना चाहते हैं कि उन्हें किस तरह से निवेश करना चाहिए। निवेश के रास्ते में बुनियादी तौर पर बाधाएं होती हैं। लोन से कार खरीदने या फिर ऑनलाइन मोटर या हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के उलट शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए केवाईसी (नो योर क्लाइंट) से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। यह उसी तरह से है, जैसे कार चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस का होना जरूरी होता है। इसीलिए यह अस्पताल में भर्ती किसी मित्र का बिल देखकर हेल्थ इश्योरेंस खरीद डालने के फैसले से अलग है। 

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आप इस आधार पर भी निवेश नहीं कर सकते कि आपने सुना था कि यह एक अच्छा विचार है या अचानक आपको बाजार में निवेश करना आकर्षक लग रहा है। निवेश की बुनियादी बातें मैं फिर दोहरा रहूं कि आपको यह समझने की जरूरत है कि किसी भी बचत या निवेश का वास्तविक रिटर्न क्या होता है। मुद्रास्फीति और आयकर के प्रभाव पर विचार करने के बाद रिटर्न की जो वार्षिक दर होती है, वही वास्तविक रिटर्न होता है। उदाहरण के लिए, एफडी (सावधि जमा) पर 7.5 फीसदी की ब्याज दर पर छह फीसदी महंगाई दर और 20 फीसदी आयकर जोड़ें, तो वास्तविक रिटर्न शून्य हो जाता है। 

हां, आपने ठीक पढ़ा, ऐसी बचत में धन रखने से आपको कोई लाभ नहीं होता। वास्तविक रिटर्न (कर के बाद)= 7.5 %- ( 6% + 20%X7.5%)=(6%+1.5%)=0। यानी यदि कोई 30 फीसदी आयकर के दायरे में हो, तो वह अपनी बचत को सुरक्षित रखने की एवज में उलटा बैंक को ही भुगतान करेगा। इसका मतलब यह है कि मुद्रास्फीति या महंगाई दर से संतुलन बिठाते हुए आपको संपत्ति अर्जित या सुरक्षित करनी चाहिए, ताकि आपके जीवन स्तर पर फर्क न पड़े। इसके अलावा आपको भविष्य के अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भी संपत्ति अर्जित करने की जरूरत होती है, ताकि आप आराम से सेवानिवृत्ति का जीवन जी सकें। ऐसे कई तरह के निवेश हैं, जिन्हें संपत्ति निर्माण की श्रेणी में रखा जा सकता है। उदहारण के लिए इक्विटी (शेयर), डेट (बांड), रियल एस्टेट, गोल्ड (कमोडिटी) और कैश इक्वीवेलेंट इत्यादि। 
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इन संपत्तियों में धन लगाने के अपने जोखिम और रिटर्न की संभावनाएं हैं। प्रत्येक संपत्ति श्रेणी की एक उचित अवधि होती है। जैसे कैश इक्वीवेलेंट अल्पावधि में अच्छा होता है, इक्विटी दीर्घकालीन विकल्प है, रियल एस्टेट मध्य और दीर्घकालीन निवेश के लिहाज से अच्छा है और सोना मध्यावधि निवेश के लिए अच्छा है। अच्छा यह हो कि जोखिम लेने की अपनी क्षमता का आकलन आप खुद करें और उसके अनुसार निवेश शुरू करें। यह महत्वपूर्ण है कि आप निवेश की शुरुआत म्यूचुअल फंड से करें, क्योंकि उनमें निवेश के लिए किसी तरह की विशेषज्ञता की जरूरत नहीं होती। आप पिछले प्रदर्शन और निवेश के उद्देश्यों को देखते हुए किसी अच्छा प्रदर्शन करने वाली फंड स्कीम में निवेश शुरू कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए अधिक धन की जरूरत भी नहीं होती, आप इसे पांच सौ रुपये के जरिये किसी एसआईपी (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) में निवेश शुरू कर सकते हैं।

निवेश का चयन
स्पष्ट समय सीमा के साथ अपने भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों और उनमें से प्रत्येक के लिए जरूरी धन की जानकारी सहित सूची बनाइए।उदाहरण के लिए यदि आप पंद्रह वर्ष में पचास लाख रुपये के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं तो आपको 12 फीसदी रिटर्न वाली किसी फंड स्कीम में हर महीने 10,000 रुपये निवेश की जरूरत होगी। म्यूचुअल फंड में निवेश का अच्छा तरीका है एसआई और शुरुआत के लिए अच्छी फंड स्कीम है ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) जो कि कर बचत म्यूचुअल फंड है। इस तरह के निवेश में आयकर की धारा 80 सी के तहत सालाना डेढ़ लाख रुपये की कर छूट भी मिलती है। ऐसे में निवेश में लॉक इन पीरियड तीन साल है जो कि छोटी अवधि है और निवेश का दायरा बढ़ाने के लिहाज से ठीक है। विक्रम इससे शुरुआत कर सकते हैं।
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