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रुपया धराशायी: डॉलर के मुकाबले सर्वकालिक निचले स्तर पर भारतीय मुद्रा, आपकी जेब पर पड़ेगा गिरावट का असर

Mon, 09 May 2022 01:01 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया कुछ ही देर में डॉलर के मुकाबले 77.17 पर खुला और कुछ ही देर में 77.42 पर आ गया। यह रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले 52 पैसे की गिरावट है।
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रुपया बनाम डॉलर - फोटो : pixabay
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विस्तार
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भारतीय मुद्रा में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले यह अब तक के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी मुद्रा में मजबूती के चलते रुपये में भारी गिरावट आई है। शुरुआती कारोबार में रुपया 52 पैसे की गिरावट के साथ 77.42 के स्तर पर आ गया।

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खुलते ही धड़ाम हुआ रुपया
बड़ी गिरावट के साथ खुलने के बाद अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया कुछ ही देर में डॉलर के मुकाबले 77.17 पर खुला और कुछ ही देर में 77.42 पर आ गया। यह रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले 52 पैसे की गिरावट है। यहां बता दें कि बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार का भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 55 पैसे टूटकर 76.90 पर बंद हुई थी। इस बीच शेयर बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 1.06 फीसदी और बीएसई सेंसेक्स 1.09 फीसदी नीचे था।

फॉरेक्स रिजर्व 600 अरब डॉलर के नीचे 
बता दें कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार कम होता जा रहा है, यह घटकर पहली बार 600 अरब डॉलर से नीचे पहुंच गया है। लगातार आठ हफ्ते से इसमें गिरावट दर्ज की जा रही है। बीती 29 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में फॉरेक्स रिजर्व 2.695 अरब डॉलर घटकर 597.73 अरब डॉलर रह गया है। इससे पहले 22 अप्रैल को खत्म हुए सप्ताह में 3.271 अरब डॉलर की कमी के साथ विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 600.423 अरब डॉलर पर आ गया था। 
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इस तरह पड़ेगा आम आदमी पर प्रभाव
डॉलर के मुकाबले रुपये के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचने के देश की अर्थव्यवस्था पर चौतरफा असर पड़ेगा। इसकी सबसे ज्यादा मार आयात बिल पर पड़ेगी क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में रुपये की गिरावट से कच्चे तेल के आयात बिल में बढ़ोतरी होगी और विदेशी मुद्रा ज्यादा खर्च होगी।  इसके अलावा, लगातार बढ़ रही महंगाई के मोर्चे पर भी मुश्किलें और बढ़ेंगी। साथ ही उर्वरक और रसायन जिनका कि भारत बड़ा आयातक है वो रुपये की कमजोरी से महंगे हो जाएंगे। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामानों से लेकर आभूषण तक महंगे हो जाएंगे। 

दरअसल, कच्चे तेल, सोना और अन्य धातुओं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में तय होती हैं। ऐसे में दिनों-दिन रुपये की बिगड़ रही हालत से इनकी खरीद के लिए हमें ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ेगा। घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ेंगी। 

विदेश में बच्चों को पढ़ाना और घूमना होगा महंगा
रुपये में गिरावट से भारतीयों के लिए विदेश में पढ़ाई करना और घूमना महंगा हो जाएगा। घरेलू मुद्रा में इस बड़ी गिरावट से विदेश में अब समान शिक्षा के लिए पहले की तुलना 15 से 20 फीसदी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को होगा नुकसान: पहले के मुकाबले महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद आयात करने होंगे। इसके अलावा, रत्न एवं आभूषण उद्योग पर भी रुपये में गिरावट का असर पड़ेगा। 

कंपनियों की मार्जिन प्रभावित
जानकारों का कहना है कि रुपये में कमजोरी का मतलब है कि अब उतने ही सामान खरीदने के लिए पहले से ज्यादा खर्च करने होंगे। इससे भारतीय कंपनियों को कच्चे माल के आयात के लिए ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। इससे उनका उत्पादन लागत बढ़ेगा क्योंकि उन्हें डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे। इसका असर आखिरकार आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। हालांकि, निर्यातकों को रुपये में गिरावट का लाभ मिलेगा क्योंकि उन्हें डॉलर मे भुगतान पर ज्यादा रुपये मिलेंगे। 

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