सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल और डीजल निर्यात पर लागू अप्रत्याशित लाभ कर में बड़ी कटौती की घोषणा की है। इस कदम से इन वस्तुओं पर लगाए गए विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) में उल्लेखनीय कमी दिखी है।
घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर एसएईडी की दर 5,000 रुपये प्रति टन से घटाकर 1,300 रुपये प्रति टन कर दी गई है। इसके साथ ही डीजल निर्यात पर एसएईडी को एक रुपये प्रति लीटर से घटाकर 0.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। ये बदलाव आज यानी 19 दिसंबर से लागू हैं।
हालांकि, इन कटौतियों के बीच सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लेवी में इजाफा कर दिया है। इस पर पहले टैक्स नहीं था, लेकिन अब इसे 1 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। यह फैसला भी आज ही यानी 19 दिसंबर से ही प्रभावी होगा। इसके अलावे, पेट्रोल पर एसएईडी शून्य बना रहेगा और हालिया परिवर्तनों से अप्रभावित रहेगा।
पाक्षिक आधार पर होता है कर में संशोधन
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और उत्पाद की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर अप्रत्याशित लाभ कर या विंडफॉल टैक्स में पाक्षिक संशोधन होता है। इससे पहले 1 दिसंबर को सरकार ने कच्चे पेट्रोलियम पदार्थों पर अप्रत्याशित लाभ कर को 6,300 रुपये प्रति टन से घटाकर 5,000 रुपये प्रति टन करने की घोषणा की गई थी।
इसके अलावा, 16 नवंबर को पिछली समीक्षा के दौरान, सरकार ने क्रूड ऑयल पर अप्रत्याशित लाभ कर को 3,500 रुपये घटाकर 9,800 रुपये प्रति टन से 6,300 रुपये प्रति टन किया था। यह फैसला वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में गिरावट के कारण लिया गया है।
विंडफॉल टैक्स क्या है?
भारत ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए जुलाई 2022 में विंडफॉल टैक्स शुरू किया था। यह कर सरकार द्वारा उन उद्योगों पर लगाया जाता है जो अप्रत्याशित रूप से लाभ अर्जित करते हैं। घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित कर तब लगाया जाता है जब वैश्विक बेंचमार्क की दरें 75 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाती हैं। डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात के लिए, शुल्क तब लागू होता है जब उत्पाद में मार्जिन या मुनाफा 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाते हैं। यह मार्जिन कच्चे तेल (कच्चे माल) की लागत और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य के बीच का अंतर है।