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गहनों के साथ सोने-चांदी की कलाकृतियों की भी होगी हॉलमार्किंग

Thu, 21 Jun 2018 09:37 AM IST
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के नियमों में बदलाव कर दिये हैं। इस बदलाव के तहत अब आभूषणों के साथ सोने-चांदी की कलाकृतियों की भी हॉलमार्किंग की जाएगी। साथ ही सरकार ने ज्वैलर्स, हॉलमार्किंग केंद्रों और रिफाइनरीज के लाइसेंस के नियम तथा फीस भी तय कर दिए हैं।
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लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बीआईएस कानून के नियमों में बदलाव उपभोक्ताओं को सोने-चांदी के माकूल आभूषण मुहैया कराने के मद्देनजर किया है। लंबे समय से देशभर से मंत्रालय को ग्राहकों से शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें मिलावट कर अनुचित सामग्री बेची गई है।

हॉलमार्किंग होने पर उपभोक्ता को यह स्पष्ट हो जाएगा कि खरीदा जाने वाला आभूषण शुद्ध है। नियमों में बदलाव करके सोने-चांदी के आभूषणों के साथ कलाकृतियों को भी हॉलमार्किंग के दायरे में लाया गया है। हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने की तारीख हालांकि अभी तय नहीं है। इस पर जल्द निर्णय लेकर सरकार अलग से अधिसूचना जारी करेगी।
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मिलेगा एक साल तक का वक्त
संशोधित नियमों के तहत हॉलमार्किंग को अनिवार्य किए जाने की तिथि के बाद अगले 6 माह से एक साल तक का वक्त स्वर्णकारों को इस नई व्यवस्था को अपनाने के लिए मिलेगा। सरकार ने इस बाबत स्वर्णकारों के पंजीकरण के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इसके तहत पंजीकरण कराने पर उन्हें एक प्रमाणपत्र अगले पांच साल तक के लिए मिलेगा जिसके लिए 2,000 रुपये की फीस चुकानी होगी।
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रखना होगा हॉलमार्क आभूषणों का रिकॉर्ड

नए नियमों के तहत हरेक पंजीकृत स्वर्णकार को सभी हॉलमार्क आभूषणों का रिकॉर्ड रखना होगा। अगर इसका उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हॉलमार्किंग के सही ना होने की स्थिति में उन्हें पहले चरण में नोटिस जारी किया जाएगा।

रद्द होगा पंजीकरण 
मंत्रालय के मुताबिक स्वर्णकार द्वारा नोटिस का जवाब अगर असंतोषजनक होगा तो उसका पंजीकरण रद्द किया जाएगा। इसके अलावा हॉलमार्किंग केंद्र खोलने के लिए उन्हें 10,000 रुपये का शुल्क देना होगा। यह केंद्र हरेक आभूषण पर 35 रुपये का शुल्क ले सकेंगे।

अगर किसी स्वर्णकार का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा तो उसे लाइसेंस के लिए साढ़े सात हजार रुपये की फीस भरनी होगी। जबकि गोल्ड रिफाइनरी को भी लाइसेंस लेना होगा, जिसका शुल्क एक हजार रुपये होगा।

मंत्रालय का मानना है कि सोने का बाजार देश में बहुत बड़ा है और आम तौर पर उपभोक्ता के पास सोने की सही परख करने का कोई साधन नहीं होता। ऐसे में यह व्यवस्था मील का पत्थर साबित होगी।
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