टमाटर की कीमतें 60-65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, जबकि दिल्ली, पटना, कोलकाता और मुंबई में प्याज 50-55 रुपये में बिक रहा, कृषि उपज बाजार समितियों के मूल्य आंकड़ों से पता चला है कि 20-25 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
देश में बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बीच अब सब्जियों, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आम-आदमी को परेशान कर रही है। रविवार को व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक सब्जियों में विशेष रूप से प्याज और टमाटर की कीमतें राष्ट्रीय राजधानी सहित शहरी क्षेत्रों में बढ़ रही हैं। क्योंकि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और भारी बारिश के कारण गर्मियों की फसलों को नुकसान हुआ है।
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उच्च वैश्विक कीमतों के कारण खाद्य तेल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। केंद्र सरकार ने 13 अक्टूबर को राज्यों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा था कि 22 मार्च तक आयात शुल्क में कटौती के बाद खाद्य तेलों की कीमतों में कमी लाई जाए।
सरकारी आंकड़ों की मानें तो मौसम की मार भी महंगाई पर पड़ी है। कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतें, जहां मौसम एक बड़ी भूमिका निभाता है। प्याज उनमें से एक है। इसकी दरें अक्सर खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती हैं और उपभोक्ताओं, गरीब या अमीर के मासिक बजट को प्रभावित करती हैं, क्योंकि सब्जी अधिकांश भारतीयों की थाली में सजती है।
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सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी होती है क्योंकि यह लगभग तीन महीने के कमजोर मौसम की शुरुआत का प्रतीक है, जब पिछली फसलों के स्टॉक खत्म हो जाते हैं, पिछले आंकड़ों से पता चलता है। ताजा फसल आमतौर पर सर्दियों में आती है।
टमाटर की कीमतें 60-65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, जबकि दिल्ली, पटना, कोलकाता और मुंबई में प्याज 50-55 रुपये में बिक रहा, कृषि उपज बाजार समितियों के मूल्य आंकड़ों से पता चला है कि 20-25 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
नासिक स्थित सोलंकी इंडिया लिमिटेड के अरुण सोलंकी ने कहा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में बारिश ने आपूर्ति लाइनों को प्रभावित किया है और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जो महाराष्ट्र में उगाई जाने वाली सब्जियों की आपूर्ति करता है।