आज भारतीय बाजारों में सोना वायदा 10 महीने के निचले स्तर पर 44731 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब सपाट था, जबकि चांदी वायदा 1.3 फीसदी बढ़कर 66,465 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इस साल सोने की कीमत में भारी गिरावट आई है। इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक भारत में सोने की कीमत 5,000 रुपये से अधिक कम हुई है और अगस्त के 56,200 रुपये के उच्च स्तर से अब तक कीमती धातु करीब 11,500 रुपये सस्ती है।
वैश्विक बाजारों में इतनी रही कीमत
पिछले सत्र में नौ महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद वैश्विक बाजारों में आज सोने की दर 0.5 फीसदी बढ़कर 1,708.51 डॉलर प्रति औंस हो गई। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते बॉन्ड यील्ड ने सोने की तेजी को सीमित रखा। अन्य कीमती धातुओं में चांदी 25.76 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि प्लैटिनम 1.1 फीसदी बढ़कर 1,142.60 डॉलर पर पहुंच गया।
गोल्ड ईटीएफ में प्रवाह जारी
दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड समर्थित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या गोल्ड ईटीएफ, एसपीडीआर गोल्ड ट्रस्ट की होल्डिंग्स शुक्रवार को 10 माह के निचले स्तर पर आ गई। स्वर्ण ईटीएफ सोने की कीमत पर आधारित होते हैं और उसके दाम में आने वाली घट-बढ़ पर ही इसका दाम भी घटता बढ़ता है। मालूम हो कि ईटीएफ का प्रवाह सोने में कमजोर निवेशक रुचि को दर्शाता है। एक मजबूत डॉलर अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोने को अधिक महंगा बनाता है।
कोटक सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा कि, 'निचले स्तर पर, सोने को प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति के रुख से समर्थन मिलता है, दुनिया के कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि, मुद्रास्फीति की चिंताओं और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से मिश्रित आर्थिक डाटा से कीमती धातु की कीमत प्रभावित होगी।'
कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों और सरकारों द्वारा राजकोषीय उपायों ने पिछले साल सोने की कीमतों में 25 फीसदी से अधिक की वृद्धि की थी, जबकि चांदी लगभग 50 फीसदी बढ़ गई थी। सोने को मुद्रास्फीति और मुद्रा में आई गिरावट के खिलाफ बचाव के रूप में देखा जाता है।