कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक बार फिर सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सेबी अध्यक्ष अपने पद पर रहते मुंबई स्थिति अपनी एक संपत्ति के एवज में किराया वसूल रही हैं। यह संपत्ति ऐसी कंपनी को किराए पर दिया गया है, जिसकी पैतृक कंपनी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच शेयर बाजार नियामक सेबी कर रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह हितों के टकराव का मामला है। यह साफ तौर पर भ्रष्टाचार है।
कांग्रेस नेता ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बुच दंपती ने मुंबई की अपनी एक संपत्ति कैरोल इंफो सर्विसेज लिमिटेड को लाखों रुपये के किराए पर दी। इस साल सेबी प्रमुख रहते हुए भी उस संपत्ति से 46 लाख रुपये से अधिक का किराया लिया गया। कैरोल इंफो सर्विसेज लिमिटेड वोकार्ट लिमिटेड से जुड़ी कंपनी है।
दोनों कंपनियों के प्रमोटर एक ही हैं। वोकार्ट वो कंपनी है, जिस पर लगे आरोपों की जांच सेबी कर रही है। वोकार्ट पर इनसाइडर ट्रेडिंग के भी आरोप लगे हैं। ऐसे में यह पूरी तरह से हितों के टकराव का मामला है। यह पूरी तरह से भ्रष्टाचार का मामला है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि सब कुछ साफ है फिर भी वे कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
कांग्रेस नेता ने कहा कि सेबी चेयरपर्सन माधबी बुच जी से जुड़ा ये मामला बेहद गंभीर है। हमें हर दिन इस मुद्दे से जुड़ी नई-नई जानकारियां मिल रही हैं। देश के करोड़ों लोग सेबी पर विश्वास करते हैं। अगर इस पर सवालिया निशान खड़े हो गए तो जनता के निवेश पर सवालिया निशान लग जाएगा। वहीं इस देश का प्रधानमंत्री, देश के साख की चिंता नहीं कर रहा- ये हमारी सबसे बड़ी चिंता है।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि यह सवाल वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा जाना चाहिए और किसी और से नहीं कि पूंजी बाजार नियामक के मामले में पारदर्शिता और ईमानदारी के पतन को दिखाने के लिए और कितने सबूतों की आवश्यकता है।
रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, अब 10 करोड़ भारतीय ऐसे हैं जिनके पास पैन हैं और जिनका इस बाजार में किसी न किसी रूप में निवेश है। क्या वे इससे बेहतर के हकदार नहीं हैं? पीएम आगे क्यों नहीं बढ़ रहे? उन्हें किस बात का डर है?"
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि 2018 और 2024 के बीच, माधबी पुरी बुच के भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य और बाद में अध्यक्ष रहते हुए बुच दंपती वॉकहार्ट लिमिटेड से संबद्ध कंपनी "कैरोल इन्फो सर्विसेज लिमिटेड" से 2.16 करोड़ रुपये किराया प्राप्त किया।
उन्होंने दिल्ली में एआईसीसी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वॉकहार्ट लिमिटेड की 2023 के दौरान इनसाइडर ट्रेडिंग सहित विभिन्न मामलों के लिए सेबी द्वारा जांच की जा रही थी। खेड़ा ने जोर देकर कहा कि यह भ्रष्टाचार का एक सीधा मामला था जो हितों के टकराव को बढ़ावा देता है, जो सेबी के 2008 के कोड की धारा 4, 7 और 8 का उल्लंघन करता है।
कांग्रेस नेता ने पूछा, "सेबी अध्यक्ष की नियुक्ति 2 मार्च, 2022 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा की गई थी, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं। क्या उनकी नियुक्ति इस शर्त पर की गई थी कि वह अपने पिछले वित्तीय संबंधों को बनाए रख सकती हैं, बशर्ते कि वह प्रधानमंत्री और उनके करीबी सहयोगियों की इच्छा के अनुसार काम करें?"
नई दिल्ली: पीएसी नियामकीय निकायों के प्रदर्शन की करेगी समीक्षा, बुच को तलब करने पर होगा फैसला
सेबी की चेयरपर्सन माधबी बुच के खिलाफ हितों के टकराव के आरोपों पर मचे राजनीतिक बवाल के बीच संसद की लोक लेखा समिति ने संसदीय अधिनियमों के तहत स्थापित नियामकीय निकायों के प्रदर्शन की समीक्षा करने का फैसला किया है।
लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल ने कहा कि समिति बुच को उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए बुलाने पर फैसला करेगी। वेणुगोपाल ने सेबी चेयरपर्सन को पीएसी के समक्ष बुलाने के बारे में पूछे गए सवालों पर कहा, "बाकी चीजों पर समिति को फैसला लेना है।"
उन्होंने कहा कि सदस्यों ने संसद के अधिनियमों के आधार पर स्थापित नियामकों के प्रदर्शन की समीक्षा सहित विभिन्न विषयों का सुझाव दिया। वेणुगोपाल ने कहा, "सदस्यों ने ये चीजें सुझाईं और हमने उन्हें (एजेंडे में) शामिल किया।"
समिति की ओर से स्वतः संज्ञान से चुने गए विषयों में संसद के अधिनियमों द्वारा स्थापित विनियामक निकायों के प्रदर्शन की समीक्षा, बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में सुधार, केंद्र प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा, ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन के लिए चल रहे नीतिगत उपाय और सार्वजनिक अवसंरचना और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं पर शुल्क, टैरिफ, उपयोगकर्ता शुल्क लगाना और उनका विनियमन शामिल हैं। पीएसी ने अपने कार्यकाल के दौरान जांच के लिए 161 विषयों का चयन किया है, इसके अलावा पिछले वर्ष से समिति के समक्ष लंबित मामले भी हैं।