भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकारी प्रतिभूतियों के अधिग्रहण कार्यक्रम (जी-सैप 1.0) के तहत 40,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खुले बाजार में खरीद की तीसरे चरण की घोषणा की। यह खरीद परिचालन 17 जून को होगा। इस पहल का मकसद बांड प्रतिफल को स्थिर और व्यवस्थित रखना है।
पहले 15 अप्रैल और 20 मई को हुई थी नीलामी
उल्लेखनीय है कि आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अप्रैल में कहा था कि आरबीआई जी-सैप 1.0 के तहत वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद खुले बाजार के जरिए परिचालित करेगा। इस प्रकार की 25,000 करोड़ रुपये की पहली नीलामी 15 अप्रैल और दूसरी 20 मई को 35,000 करोड़ रुपये की हुई थी।
10,000 करोड़ रुपये तक खरीदे जाएंगे राज्य विकास ऋण
केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि, 'रिजर्व बैंक 17 जून को सरकारी प्रतिभूति अधिग्रहण कार्यक्रम (जी-सैप 1.0) के तहत खुले बाजार से खरीद की तीसरी किस्त के तहत 40,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद का परिचालन करेगा।' इसमें से राज्य विकास ऋण (एसडीएल) 10,000 करोड़ रुपये तक खरीदे जाएंगे।
दूसरी तिमाही में जी-सैप 2.0 के परिचालन का निर्णय
आरबीआई के अनुसार जी-सैप 1.0 के तहत अब तक हुई दो नीलामी में बाजार प्रतिभागियों ने अच्छी रुचि दिखाई है। रिजर्व बैंक ने 2021-22 की दूसरी तिमाही में जी-सैप 2.0 के परिचालन का निर्णय किया। साथ ही बाजार को समर्थन देने के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये के द्वितीयक बाजार खरीद संचालन करने का भी फैसला किया है।
चालू वित्त वर्ष आर्थिक वृद्धि दर 9.5 फीसदी रहनेका अनुमान
कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के कारण अनिश्चितता के बीच रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम करके 9.5 फीसदी कर दिया। इससे पहले वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि 10.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा के परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि कोविड-19 संक्रमण और मृतकों की संख्या में अचानक वृद्धि से अर्थव्यवस्था में सुधार की जो शुरुआत हुई थी वह कमजोर पड़ गई। हालांकि, यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई।