आरबीआई मौद्रिक नीति: गवर्नर शक्तिकांत दास
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चार अगस्त को शुरू हुई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक आज समाप्त हो गई। कोरोना की दूसरी लहर के चलते अप्रैल और मई के दौरान देश के कई हिस्सों में लगाई गई सख्त पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। ऐसे में तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच यह बैठक बेहद अहम है। हर दो महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होती है। इस बैठक में अर्थव्यवस्था में सुधार पर चर्चा की जाती है और साथ ही ब्याज दरों का फैसला लिया जाता है। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत दरों में संशोधन किया था।
खास बातें:
- आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यह चार फीसदी पर बरकरार है। यानी ग्राहकों को ईएमआई या लोन की ब्याज दरों पर नई राहत नहीं मिली है।
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट भी 4.25 फीसदी पर स्थिर है।
- दास ने आगे कहा कि रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर स्थिर रखा गया है।
- इसके साथ ही बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया है। यह 4.25 फीसदी पर है।
- केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक रुख को 'उदार' बनाए रखा है। उदार रुख पर छह में से पांच सदस्य सहमत थे।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की वास्तविक जीडीपी में 9.5 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया है।
- इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 21.4 फीसदी होगी, दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.1 फीसदी।
- शक्तिकांत दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश की वास्तविक जीडीपी 17.2 फीसदी रह सकती है।
- मुद्रास्फीति पर दास ने कहा कि, वित्त वर्ष 2021-2022 में सीपीआई मुद्रास्फीति 5.7 फीसदी रह सकती है। पिछली बैठक में 5.1 फीसदी का अनुमान लगाया गया था।
- दूसरी तिमाही में महंगाई दर 5.9 फीसदी रह सकती है, तीसरी तिमाही में 5.3 और चौथी तिमाही में यह 5.8 फीसदी हो सकती है।
- वहीं केंद्रीय बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-2023 की पहली तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति 5.1 फीसदी रह सकती है।
- दास ने कहा कि वृद्धि के लिए पॉलिसी सपोर्ट जरूरी है। केंद्रीय बैंक का ध्यान सप्लाई और डिमांड को बेहतर करने पर है।
- उन्होंने कहा कि टीकाकरण से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
- कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से अब अर्थव्यवस्था उबर रही है। टीकाकरण बढ़ने से इकोनॉमिक एक्टिविटी बढ़ी है।
- आगे शक्तिकांत दास ने कहा कि जून के मुकाबले जुलाई में आर्थिक सुधार बेहतर रहा। कोरोना की तीसरी लहर के प्रति चौकन्ना रहने की जरूरत है।
- आरबीआई ने नकदी के मोर्चे पर अतिरिक्त उपायों की घोषणा की।
- आरबीआई ने सरकारी प्रतिभूति खरीद कार्यक्रम (जी-सैप) 2.0 के तहत अगस्त में 25,000-25,000 करोड़ रुपये की दो और नीलामी का प्रस्ताव किया है।
- 12 अगस्त और 26 अगस्त को G-SAP ऑक्शन का आयोजन किया जाएगा।
- केंद्रीय बैंक ने कहा कि घरेलू बाजार में कर्ज की लागत कम हुई है। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), आवास और बड़े उद्योगों के लिए नीतिगत दर में कटौती का लाभ बेहतर रहा।
- गवर्नर ने फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए व्यक्तिगत होम लोन और वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए ब्याज दरों में उल्लेखनीय कटौती बेहतर साबित हुई है।
- महत्वपूर्ण आंकड़े जैसे पीएमआई और बिजली खपत बताते हैं कि खपत, निवेश और बाहरी मांग पटरी पर लौट रही है।
- साथ ही शक्तिकांत दास ने बताया कि विदेशी मुद्रा में निर्यात कर्ज को लेकर दिशानिर्देश में संशोधन किया गया है। कंपनियों की मदद के लिए कर्ज पुनर्गठन छह महीने के लिए बढ़ाया गया है। इसे एक अक्तूबर 2022 किया गया है।
- इसके अलावा, आरबीआई ने लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन (TLTRO) तीन महीने यानी 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ाने का निर्णय किया। इसके जरिए बैंक अधिक समय तक दबाव वाले क्षेत्रों को कर्ज दे सकेंगे।
- मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक छह से आठ अक्तूबर को होगी।