पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक बैंक में हुए 6500 रुपये के घोटाले के तीन महीने के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि व्हिसिलब्लोअर बैंक का ही कर्मचारी था, जिसने सबसे पहले इसका पर्दाफाश किया था। उस कर्मचारी ने आरबीआई को इसकी जानकारी न देने पर गुस्से में खुदकुशी करने की धमकी भी दी थी। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा जल्द ही कोर्ट में 32 हजार पन्नों की चार्जशीट को दाखिल कर दी है, जिसमें पांच आरोपियों का नाम दिया गया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक व्हिसिलब्लोअर पीएमसी बैंक में वरिष्ठ अधिकारी है। एचडीआईएल के छुपे हुए खातों के बारे में आरबीआई को जानकारी न देने से यह गुस्से में था। इस अधिकारी का बैंक के अन्य अधिकारियों से झगड़ा हुआ था। इसके बाद इस अधिकारी ने खुदकुशी की धमकी देते हुए बैंक जाना और फोन उठाना बंद कर दिया। इसके बाद बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस कुछ अधिकारियों के साथ इससे मिलने गए थे।
32 हजार पन्ने की इस चार्जशीट में मुंबई पुलिस ने एचडीआईएल के निदेशक राकेश वधावन, बेटे सारंग वधावन, जॉय थॉमस, बैंक के पूर्व चेयरमैन वरयाम सिंह और पूर्व निदेशक सुरजीत सिंह अरोड़ा को आरोपी बनाया है।
सूत्रों के मुताबिक व्हिसिलब्लोअर ने सबसे पहले सितंबर की शुरुआत में एचडीआईएल के खातों के बारे में जानकारी आयकर विभाग से साझा की दी थी। इसके बाद व्हिसिलब्लोअर ने बताया कि उसने आरबीआई को जानकारी दे दी है। फिर 18 सितंबर को बैंक के कुछ अधिकारियों ने आरबीआई से संपर्क करने की सोच ली। फिर थॉमस और पांच अधिकारी आरबीआई के एग्जिक्यूटिव निदेशक से मिले और बैंक की वित्तीय स्थिति के बारे में बताया। आरबीआई ने इसके बाद पीएमसी बैंक का निरीझण किया और 23 सितंबर को खाताधारकों पर पैसा निकालने पर रोक लगा दी थी।