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पीएनबी स्कैम से ज्वेलरी, डायमंड बेचने वाले कारोबारियों पर नई मुसीबत, बैंकों से लोन मिलने में परेशानी

Mon, 19 Feb 2018 11:41 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पंजाब नेशनल बैंक में हुए 114 अरब के महाघोटाले के बाद ज्वेलरी, डायमंड का कारोबार करने वाले कारोबारियों पर एक नई मुसीबत आ खड़ी हुई है। अब बैंक ऐसे कारोबारियों को लोन देने के प्रोसेस में नियमों को कड़ा कर दिया है। वहीं लोन के एवज में संपत्ति या फिर अन्य वस्तुओं को ज्यादा राशि में गिरवी रखना पड़ेगा। 

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लोन मिलना होगा मुश्किल
नीरवगेट के बाद से बैंकों ने ऐसे कारोबारियों को लोन देने पर फिलहाल अस्थायी रोक सी लगा दी है। इससे इन कारोबारियों को आगे व्यापार करने में काफी परेशानी हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस इंडस्ट्री में उधार पर सामान मिलता नहीं है।

नकद पर गोल्ड, सिल्वर और अन्य हीरे व जवाराहत मिलते हैं। सेनको गोल्ड के चेयरमैन शंकर सेन ने कहा कि बैंक से पैसा मिलना मुश्किल होगा। यह एक हाई वैल्यू प्रोडक्ट इंडस्ट्री है। फाइनेंसरों के लिए इसके स्टॉक को ट्रैक करना भी मुश्किल होगा। 

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एक्सपोर्ट करने वाले कारोबारियों को होगी मुश्किल

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भारत में दो तरह के ज्वेलरी व्यापारी हैं। एक वो जो कि स्थानीय स्तर पर कारोबार करते हैं, दूसरे वो जो विदेश में अपना माल एक्सपोर्ट करते हैं। इसमें अपना माल बाहर एक्सपोर्ट करने वाले व्यापारियों को मुश्किल होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि वो बैंकों से मिलने वाले लोन के सहारे ही अपना व्यापार करते हैं, जिसमें अब मुश्किल होगी। 

देश भर में 5 लाख से अधिक कंपनियां
जेम्स ज्वेलरी के कारोबार में भारत में 5 लाख से अधिक कंपनियां रजिस्टर्ड हैं, जिसमें 25 लाख लोग नौकरी कर रहे हैं। इस इंडस्ट्री की  जीडीपी में 6 से 7 फीसदी की हिस्सेदारी है। वहीं इस सेक्टर के चलते देश को काफी पर्याप्त संख्या में विदेशी मुद्रा भी मिलती है। वहीं एसबीआई ने पिछले तीन सालों में इस सेक्टर को लोन देने में काफी कटौती की है। 

शेयर बाजार में नहीं है लिस्टेड कंपनियां 
बैंकों को ऐसी कंपनियों को लोन देने में कई तरह का रिस्क रहता है। पहला तो ज्यादातर कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। दूसरा, उनके बिजनेस करने के मॉडल पर हमेशा से सवालिया निशान उठते रहें हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन भारतीय कंपनियों के ज्यादातर ऑफिस विदेश में हैं।  
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