पूर्व आरबीआई गवर्नर बिमल जालान की अगुआई ने केंद्रीय बैंक के कैपिटल रिजर्व के सरप्लस को सरकार को ट्रांसफर करने के मसले पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, पैनल ने अपनी रिपोर्ट में आरबीआई के सरप्लस कैश को 3 से 5 साल में सरकार को ट्रांसफर करने की सिफारिश की है।
आरबीआई के इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के रिव्यू के लिए 6 दिसंबर, 2018 को पैनल का गठन किया गया था। सूत्रों ने कहा कि पैनल ने रिपोर्ट तैयार कर ली है और आगे मीटिंग नहीं होगी। नौ लाख करोड़ रुपए के सरप्लस को लेकर सरकार और पूर्व गर्वनर उर्जित पटेल के बीच मतभेद रहे थे।
अटकलें यह भी लगाई जा रही थीं कि केंद्र सरकार कुल आरक्षित निधि 9.6 लाख करोड़ रुपए की एक तिहाई रकम का हस्तांतरण चाहती है। पिछले साल सरकार ने कहा था कि आरबीआई को 3.6 लाख करोड़ रुपए या एक लाख करोड़ रुपए हस्तांतरित करने के लिए कहने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
आरबीआई के पास आकस्मिक निधि 2.32 लाख करोड़ रुपए, परिसंपत्ति विकास निधि 22,811 करोड़ रुपए, मुद्रा व स्वर्ण पुनर्मूल्यांकन खाता 6.91 लाख रुपए और निवेश पुनर्मूल्यांकन खाता रि-सिक्योरिटीज 13,285 करोड़ रुपए है। इस प्रकार आरबीआई के पास कुल फंड 9.59 लाख करोड़ रुपए है।
आरबीआई के रिजर्व के मुद्दे पर पहले भी तीन कमेटी बनाई गई थी। 1997 में बी सुब्रमण्यम, 2004 में उषा थोराट और 2013 में वाई एच मालेगम की कमेटी बनी। सुब्रमण्यम पैनल ने आकस्मिक फंड को 12% तक रखने की सिफारिश की थी। थोराट पैनल ने इसे 18% से ऊपर रखने की सिफारिश की थी।
26 दिसंबर 2018 को सरकार के साथ बड़े विवाद का कारण रहे आरबीआई के पूंजी मसले को सुलझाने के लिए पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुवाई में छह सदस्यीय पैनल गठित किया गया था। समिति के गठन के समय केंद्रीय बैंक ने बताया था कि आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव राकेश मोहन इस इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क समिति के उपाध्यक्ष होंगे।
गठन के समय आरबीआई ने बयान में कहा था कि पूर्व गवर्नर बिमल जालान इस समिति की अगुवाई करेंगे जबकि आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन भी पैनल में शामिल होंगे। इसके अलावा केंद्रीय बैंक के दो निदेशक भारत दोषी और सुधीर मांकड़ भी समिति के सदस्यों में शामिल थे।
समिति को अपनी पहली बैठक के बाद 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय होना था कि आरबीआई के लाभांश में से कितनी पूंजी सरकार को दी जा सकती है और कितनी पूंजी आरबीआई के पास सुरक्षित रहेगी। जालान समिति द्वारा आरबीआई की आरक्षित पूंजी के उपयुक्त स्तर के बारे में रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के बाद अब इस संदर्भ में कोई बैठक नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, पैनल ने अपनी रिपोर्ट में आरबीआई को सरप्लस कैश को तीन से पांच साल में सरकार को देने की सिफारिश की है।