आयकर विभाग के एक करोड़ रुपये या इससे ज्यादा रकम दबाकर बैठे व्यक्ति अब बदनाम होंगे क्योंकि विभाग ने ऐसे करदाताओं का नाम सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।
यह फैसला इसी वित्त वर्ष से लागू हो रहा है। पिछले साल विभाग ने इस तरह की परिपाटी शुरू की थी लेकिन उस समय बीस से तीस करोड़ रुपये दबाने वालों का नाम, पता, संपर्क और पैन नंबर का प्रकाशन देश के प्रमुख दैनिकों में किया गया था। यदि कर की रकम दबाने वाली कोई कंपनी है तो ऐसे मामलों में कंपनी के प्रमुख शेयर धारकों का नाम उजागर किया गया था। अभी तक देशभर के ऐसे 67 बकाएदारों का नाम उजागर हो चुका है।
अब रकम की सीमा को कम करते हुए इसे एक करोड़ रुपये तक ले आया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस दायरे में आने वाले सभी करदाता, चाहे वह व्यक्तिगत हों या कारपोरेट, का नाम उजागर किया जाएगा। इनका नाम अगले साल 31 जुलाई से पहले प्रकाशित कर दिया जाएगा।
इस बारे में केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड -सीबीडीटी- से जरूरी आदेश जारी किया जा चुका है। उनके मुताबिक इस अभ्यास का उद्देश्य इस तरह के कर चोरों के बारे में आम जनता को सूचित करना है, कि इन लोगों ने तमाम प्रयासों के बावजूद कर का भुगतान नहीं किया है।