कोरोना वायरस महामारी के दौरान हर घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ी है। कमाई न होने के चलते लोगों को अपनी बचत में से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में कई लोग लोन ले रहे हैं। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और रेपो दर को चार फीसदी पर पूर्ववत रखा गया है। लेकिन इसके बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक ने सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में कटौती की, जिससे लोगों को सस्ती दरों पर लोन मिलेगा।
बैंक ऑफ बड़ौदा
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने कहा कि उसने कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) 0.05 फीसदी घटा दी है। बीओबी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि एमसीएलआर में कटौती विभिन्न अवधि की दरों पर की गयी है। नई दरें 12 जून 2021 से प्रभाव में आएंगी। एक साल की अवधि के लिए एमसीएलआर को संशोधित कर 7.35 फीसदी कर दिया गया है। छह महीने और तीन महीने की अवधि के लिये भी एमसीएलआर 0.05 फीसदी घटाकर क्रमश: 7.20 फीसदी और 7.10 फीसदी कर दिया गया है।
पंजाब नेशनल बैंक
सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने एक साल की कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) 0.05 फीसदी घटाकर 7.30 फीसदी कर दी है। बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि कोष की सीमांत लागत आधारित संशोधित ब्याज दर एक जून 2021 से प्रभाव हो गई है। छह महीने और तीन महीने की अवधि के लिए एमसीएलआर में 0.10 फीसदी की कटौती की गई है और इस कटौती के बाद ब्याज दर क्रमश: सात फीसदी और 6.80 फीसदी होगी। एक दिन, एक महीने और तीन साल की अवधि के लिए एमसीएलआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
केनरा बैंक
इससे पहले केनरा बैंक ने एमसीएलआर और रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) में बदलाव किया था। नई दरें सात मई 2021 से लागू हुई हैं। होम लोन पर महिलाओं के लिए आरएलएलआर 6.90 फीसदी और अन्य के लिए 6.95 फीसदी है। चार पहिया समेत कृषि कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाले लोन की दर 7.35 फीसदी और दो पहिया वाहनों के लिए यह 9.05 फीसदी है। एजुकेशन लोन की अलग-अलग योजनाओं के तहत यह 6.90 फीसदी से 8.90 फीसदी के बीच है।
क्या है एमसीएलआर?
ग्राहक जब किसी बैंक से लोन लेते हैं, तो बैंक द्वारा लिए जाने वाले ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर कहा जाता है। इसी आधार दर की जगह पर अब बैंक एमसीएलआर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसकी गणना धनराशि की सीमांत लागत, आवधिक प्रीमियम, संचालन खर्च और नकदी भंडार अनुपात को बनाए रखने की लागत के आधार पर की जाती है। बैंकिंग क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक ने एक अप्रैल 2016 से देश में मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग के आधार पर एमसीएलआर की शुरुआत की थी।