एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवाडा ने कहा कि थोड़े समय के विपरीत प्रभाव के बावजूद हाल में लागू हुए जीएसटी जैसे सुधारों के लाभ भविष्य में भारत की विकास दर को ऊपर ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियमों के उदारीकरण और कारोबारी सहूलियत बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे सरकारी कदमों की वजह से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के तेज प्रवाह से विकास को और बल मिलेगा।
एडीओ रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के संरक्षणवादी कदमों से अभी तक एशिया का आयात और निर्यात प्रभावित नहीं हुआ है। इसके (अमेरिकी शुल्क) विरुद्ध बदले की कार्रवाई से हालांकि एशियाई परिदृश्य को प्रभावित करने वाला कारोबारी और उपभोक्ता मनोबल प्रभावित हो सकता है।
सबसे तेज एशियाई अर्थव्यवस्था का खिताब रहेगा बरकरार
एडीबी इंडिया के कंट्री निदेशक केनिचि योकोयामा ने कहा कि भारत पूरे एशिया की सबसे तेज विकास दर वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। उन्होंने हालांकि कहा कि बढ़ते जा रहे फंसे कर्ज (एनपीए) और कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के जोखिम जेसे मुद्दे देश के सामने खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी शुल्कों में वृद्धि का असर अधिक नहीं होने वाला है, लेकिन फिर भी भारत को चौकस रहने की जरूरत है। सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमत साबित हो सकती है।
एशिया की विकास दर रहेगी 6 फीसदी
एशियाई विकास परिदृश्य रिपोर्ट में एशिया के लिए इस साल छह फीसदी और 2019 में 5.9 फीसदी विकास का अनुमान रखा गया है। रिपोर्ट में एशिया के लिए जोखिम भी बताए गए हैं। व्यापार तनाव निश्चित रूप से सबसे बड़ा जोखिम है।
दूसरा जोखिम है तेजी से पूंजी का इस क्षेत्र से बाहर निकलना, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बाजार की उम्मीद से अधिक तेजी से ब्याज दर बढ़ाने की स्थिति में हकीकत बन सकता है। कुछ अर्थव्यवस्थाओं में निजी कंपनियों के कर्ज में लगातार हो रही वृद्धि भी विकास को प्रभावित कर सकती है। एशिया हालांकि इन झटकों से उबरने में पूरी तरह सक्षम दिख रहा है।