बाजार में नकदी की किल्लत से जूझ रहे लोगों का अब आटा भी गीला होने लगा है। गेहूं के दाम में पिछले एक महीने के दौरान 15 फीसदी की तेजी आई है, वहीं नोटबंदी के बाद आटे का खुदरा दाम प्रति किलो 7 से 8 रुपये तक बढ़ गया है। हालांकि सब्जियों के थोक भाव में गिरावट आई है लेकिन चना दाल में 10 रुपये से लेकर 38 रुपये तक प्रति किलो तेजी आई है। कुछ खाद्य तेलों के भाव में भी इजाफा हुआ है।
थोक व खुदरा व्यापारियों के मुताबिक, नोटबंदी के बाद गेहूं, चावल जैसी चीजों को व्यापारी अधिक मात्रा में स्टोर कर रहे हैं। नकदी की कमी से रबी की बुआई में 10 दिनों की देरी हो चुकी है। व्यापारियों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से बाजार में कम मात्रा में गेहूं भेजा जा रहा है। इसका असर भी गेहूं के दाम पर दिख रहा है। दिल्ली अनाज मंडी के कारोबारी सुनील गुप्ता ने बताया कि सरकार की तरफ से 2015-16 में 9.35 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब यह उत्पादन 8.80 करोड़ टन रह सकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की मंडी में गेहूं के औसत भाव अभी 2250 रुपये प्रति क्विंटल है।
एक-डेढ़ माह पहले तक 21-22 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिकने वाला आटा 28-29 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। केंद्रीय भंडार में अक्तूबर माह में 220 रुपये में 10 किलोग्राम के आटे के पैकेट की कीमत 280 रुपये हो गई है। केंद्रीय भंडार के कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गत 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद केंद्रीय भंडार में 1000-500 रुपये के नोट के चलन को जारी रखने की वजह से आटे की मांग में कई गुना बढ़ गई है।
सीमा तय नहीं होने की वजह से पुराने नोटों से कई ग्राहक 50-100 किलोग्राम तक आटे की खरीदारी कर रहे हैं। नरेला अनाज मंडी में गेहूं के व्यापारी जयबीर राणा ने बताया कि गेहूं के दाम में बढ़ोतरी का सिलसिला अभी जारी रह सकता है और पिछले माह के मुकाबले 25 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।