क्या रतन टाटा, टाटा समूह की सबसे ज्यादा कमाऊ कंपनियों में से एक टीसीएस को आईबीएम को बेचना चाहते थे? टाटा सन्स के बर्खास्त चेयरमैन साइरस मिस्त्री की चिट्ठी से तो यही जाहिर होता है। मिस्त्री ने रतन टाटा कैंप की ओर से लगातार हो रहे हमलों के जवाब में पांच पेज की चिट्ठी जारी करते हुए कहा है कि उनके ऊपर लगाया यह आरोप बिल्कुल गलत है कि वह टीसीएस और जगुआर लैंड रोवर में कुछ भी योगदान नहीं कर रहे थे।
मिस्त्री ने पलटवार कहते हुए कहा कि मेरे ऊपर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं जबकि सचाई यह है कि एक वक्त रतन टाटा टीसीएस को आईबीएम को बेचने पर उतारू थे। इतना ही नहीं इस तरह के फैसले के लिए तैयार रतन टाटा के अहम में उनसे कोरस जैसा महंगा अधिग्रहण भी करवाया। इस अहम की वजह से कोरस को टाटा समूह ने उसकी असली कीमत से दोगुनी कीमत पर खरीदा।
साइरस मिस्त्री के दफ्तर से जारी चिट्ठी में कहा गया है, ‘मेरे बारे में तथ्यों को दुरुस्त कर लिया जाए तो अच्छा है। लोगों के बीच ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि मिस्त्री कठपुतली चेयरमैन थे और उनके नेतृत्व के दौरान टीसीएस और जेएलआर को कोई और चला रहा था।’
चिट्ठी में आगे कहा गया है, ‘एक वक्त अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा ने समूह की सबसे अहम कंपनी टीसीएस को आईबीएम को बेचने का मन बना लिया था।’ मिस्त्री ने इस मामले पर किसी खास समय का जिक्र तो नहीं किया है लेकिन कहा है कि उस दौरान टीसीएस के चीफ एफसी कोहली की बीमारी ने जेआरडी टाटा को इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से रोक दिया था। रतन टाटा आईबीएम की संयुक्त हिस्सेदारी वाली टीसीएस का नेतृत्व कर रहे थे। चीफ कोहली अस्पताल में भर्ती थे।