वाणिज्य मंत्रालय ने उभरते उद्यमियों की मदद के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में फरवरी, 2019 के बाद 342 स्टार्टअप्स को एंजल टैक्स में छूट दी गई है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि कुल 381 स्टार्टअप्स ने एंजल टैक्स में रियायत पाने के लिए आवेदन किया था। इनमें से 342 स्टार्टअप्स को ही केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से इसकी मंजूरी मिल सकी। बाकी बचे 39 स्टार्टअप्स के आवेदनों में कुछ कमियां थीं, जिनके समाधान के लिए मंत्रालय अपनी टीम के साथ काम कर रहा है।
अधिकारी के मुताबिक, एंजल टैक्स में छूट का दावा करने के बाद कई स्टार्टअप्स को आयकर अधिनियम-1961 की धारा 56(2) के तहत टैक्स चुकाने संबंधी नोटिस मिल रहे हैं। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने सीबीटीडी के साथ परामर्श कर इन मुद्दों को हल किया। दरअसल, आयकर अधिनियम की धारा 56 (2) (7बी) में प्रावधान है कि अगर कोई स्टार्टअप अपने उचित बाजार मूल्य से अधिक राशि जुटा लेता है तो उस राशि को अन्य स्रोतों से प्राप्त आय समझा जाएगा और इस पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा। इस धारा को 2012 में जोड़ा गया था। इस धारा के तहत टैक्स छूट का लाभ पाने के लिए योग्य स्टार्टअप को डीपीआईआईटी के समक्ष हस्ताक्षर सहित स्व-घोषणा पत्र दाखिल करना होगा। इसके बाद उसे सीबीडीटी के पास भेजा जाता है, जो जांच के बाद टैक्स छूट देने का प्रमाणपत्र जारी करता है।
स्टार्टअप की परिभाषा में मिली थी ढील
सरकार ने इस साल फरवरी में उभरते उद्यमियों के बड़ी राहत देते हुए स्टार्टअप की परिभाषा में ढील दी थी। साथ ही 25 करोड़ रुपये तक के निवेश पर एंजल टैक्स से पूरी तरह रियायत दी थी। अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने और मजबूत करने के लिए सभी कदम उठा रहा है। वहीं, डीपीआईआईटी की ओर से स्टार्टअप कारोबार और नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करने सहित कई अन्य उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।