सबसे खास बात यह है कि गतिविधियों में शामिल होने के लिए आपका वैज्ञानिक या किसी स्पेस एजेंसी से जुड़ा होना आवश्यक नहीं है। स्कूलों, म्यूजियम, प्लेनेटेरियम, स्पेस कंपनियों और एस्ट्रोनॉमी क्लबों में लोगों को अंतरिक्ष की दुनिया को करीब से समझने का मौका दिया जाता है। कहीं रॉकेट और स्पेस मिशन के बारे में जानकारी दी जाती है, तो कहीं बच्चों और युवाओं के लिए अंतरिक्ष से जुड़े खास कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
इस साल थीम है रॉकेट क्रांति (Rocket Revolution)
वर्ल्ड स्पेस वीक 2026 की थीम रॉकेट क्रांति रखी गई है। यह थीम बताती है कि बीते कुछ वर्षों में अंतरिक्ष तक पहुंचने की तकनीक का कितनी तेजी से विकास हो रहा है। रॉकेट तकनीक में किए जा रहे नए प्रयोगों ने अंतरिक्ष अभियानों को पहले के मुकाबले ज्यादा आधुनिक और किफायती बनाने की दिशा में नई संभावनाएं बढ़ाई हैं। एक समय था ऐसा था कि अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले रॉकेट मुख्य तौर पर सरकारी स्पेस प्रोग्राम का हिस्सा होते थे। लॉन्च के बाद उनका दोबारा इस्तेमाल करना भी संभव नहीं था और हर मिशन के लिए एक नए रॉकेट की जरूरत पड़ती थी।
रीयूजेबल रॉकेट ने तस्वीर बदल दी
अंतरिक्ष की दुनिया में रीयूजेबल रॉकेट ने बड़ा बदलाव लाया है। इन रॉकेटों को लॉन्च के बाद धरती पर वापस उतारा जा सकता है और जरूरी जांच एवम रखरखाव के बाद दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक के विकास की वजह से अंतरिक्ष मिशनों की लागत कम करने और कम समय में ज्यादा लॉन्च करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। यही वजह है कि रॉकेट तकनीक में हो रहे बदलाव रॉकेट क्रांति की थीम को खास बनाता है। वर्ल्ड स्पेस वीक का मकसद अंतरिक्ष के प्रति लोगों की जिज्ञासा बढ़ाने के साथ ही यह भी समझाना है कि अंतरिक्ष विज्ञान और रॉकेट तकनीक भविष्य में हमारी दुनिया को किस तरह प्रभावित कर सकती है।
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क्या है वर्ल्ड स्पेस वीक का महत्व?
वर्ल्ड स्पेस वीक की तारीखें भी अंतरिक्ष इतिहास की दो बड़ी घटनाओं से जुड़ी हुई हैं। 4 अक्तूबर 1957 को सोवियत संघ ने स्पूतनिक1 (Sputnik 1) लॉन्च किया था।यह पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित उपग्रह था। इसके बाद 10 अक्तूबर 1967 को बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) लागू हुई थी। इस संधि ने अंतरिक्ष के इस्तेमाल और उसके शांतिपूर्ण अन्वेषण से जुड़े कई बुनियादी नियम तय किए। यह अंतरराष्ट्रीय समझौता है जो चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों समेत अंतरिक्ष की खोज और इस्तेमाल को नियंत्रित करता है।
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वर्ल्ड स्पेस वीक की संयुक्त राष्ट्र ने 1999 में की थी शुरुआत
संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations) ने वर्ष 1999 में वर्ल्ड स्पेस वीक मनाने का एलान किया था। इसके बाद हर वर्ष 4 से 10 अक्तूबर तक यह सप्ताह मनाया जाता है। इसका मकसद बच्चों और युवाओं को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के प्रति आकर्षित करना है। इस सप्ताह में विज्ञान की कक्षाओं से लेकर प्रदर्शनियां, स्पेस टॉक और एस्ट्रोनॉमी एक्टिविटीज तक आयोजना होता है।
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क्या है 2026 में Pokémon का स्पेस कनेक्शन
वर्ल्ड स्पेस वीक में एक दिलचस्प पोकेमॉन (Pokémon) ट्विस्ट भी सामने आया है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी और द पोकेमॉन कंपनी इंटरनेशनल ने अंतरिक्ष से जुड़ी प्रदर्शनी और और Pokémon GO इवेंट के लिए हाथ मिलाया है।