दाहिने हाथ की तरफ जो रासायनिक तत्व थे वो चमकीले ब्लू घेरे में थे। ये रासायनिक रूप से स्थिर तत्व होते हैं। ये बदलते नहीं हैं और यही इसकी खासियत होती है। लेकिन एक परेशानी भी है कि ये नोबल गैस समूह के होते हैं। ये गैस गंधहीन और रंगहीन होती हैं, जिनकी रासायनिक प्रतिक्रिया की क्षमता कम होती है।
यही कारण है कि इन्हें मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाना आसान नहीं होता। क्योंकि इन्हें लेकर घूमना एक चुनौती होगा। चूंकि ये रंगहीन होते हैं, इसलिए इसे पहचानना भी मुश्किल होता और गलती से इनका कंटेनर खुल जाए तो आपकी कमाई हवा हो जाती।
इस श्रेणी में मरकरी और ब्रोमीन तो हैं पर वे लिक्विड स्टेट में हैं और जहरीले होते हैं। दरअसल सभी मेटलॉइड्स या तो बहुत मुलायम होते हैं या फिर जहरीले। पीरियॉडिक टेबल गैस, लिक्विड और जहरीले रासायनिक तत्वों के बिना कुछ ऐसा दिखेगा।
ऊपर के टेबल में सभी नॉन-मेटल तत्व भी गायब हैं, जो गैस और लिक्विड तत्व के आसपास थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन नॉन-मेटल को न तो फैलाया जा सकता है और न ही सिक्के का रूप दिया जा सकता है। ये दूसरे मेटल के मुकाबले मुलायम भी नहीं होते हैं, इसलिए ये मुद्रा बनने की दौड में पीछे रह गए।
सेला ने अब हमारा ध्यान पीरियोडिक टेबल की बाईं ओर खींचा। ये सभी रासायनिक तत्व ऑरेंज कलर के घेरे में थे। ये सभी मेटल हैं। इन्हें मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है पर परेशानी यह है कि इनकी रासायनिक प्रतिक्रिया क्षमता बहुत ज्यादा होती है।
लिथियम जैसे मेटल इतने प्रतिक्रियाशील होते हैं कि जैसे ही ये हवा के संपर्क मे आते हैं, आग लग जाती है। अन्य दूसरे खुरदरे और आसानी से नष्ट होने वाले हैं। इसलिए ये ऐसे नहीं हैं, जिसे आप अपनी जेबों में लेकर घूम सकें।
इसके आसपास के रासायनिक तत्व प्रतिक्रियाशील होने की वजह से इसे मुद्रा बनाया जाना मुश्किल है। वहीं, एल्कलाइन यानी क्षारीय तत्व आसानी से कहीं भी पाए जा सकते हैं। अगर इसे मुद्रा बनाया जाए तो कोई भी इसे तैयार कर सकता है। अब बात करें पीरियॉडिक टेबल के रेडियोएक्टिव तत्वों की तो इन्हें रखने पर नुकसान हो सकता है।
ऊपर की तस्वीर में बचे रासायनिक तत्वों की बात करें तो ये रखने के हिसाब से सुरक्षित तो हैं लेकिन ये इतनी मात्रा में पाए जाते हैं कि इसका सिक्का बनाना आसान हो जाएगा, जैसे कि लोहे के सिक्के। मुद्रा के रूप में उस रासायनिक तत्व का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जो आसानी से नहीं मिलते हों।
अब अंत में पांच तत्व बचते हैं जो बहुत मुश्किल से मिलते हैं। सोना(Au), चांदी(Ag), प्लैटिनम(Pt), रोडियम(Rh) और पलेडियम(Pd)। ये सभी तत्व कीमती होते हैं। इन सभी में रोडियम और प्लेडियम को मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता था लेकिन इनकी खोज उन्नीसवीं शताब्दी में की गई थी, जिसकी वजह से प्राचीन काल में इनका इस्तेमाल नहीं किया गया था। तब प्लैटिनम का इस्तेमाल किया जाता था पर लेकिन इसे गलाने में तापमान को 1768 डिग्री तक ले जाना होता है। इस वजह से मुद्रा की लडाई में सोने और चांदी की जीत हुई।
चांदी का इस्तेमाल सिक्के के रूप में तो हुआ पर परेशानी यह थी कि हवा में मौजूद सल्फर से प्रतिक्रिया कर कुछ काली पड जाती है। चांदी की तुलना में सोना आसानी से नहीं मिलता है और यह काला भी नहीं पडता।
सोना ऐसा तत्व है जो आर्द्र हवा में हरा नहीं होती है। सेला कहते हैं कि यही वजह है मुद्रा की दौड में सोना सबसे आगे और अव्वल रहा। वो कहते हैं कि यही वजह है कि हजारों सालों के प्रयोग और कई सभ्यताओं ने सोने को मुद्रा के रूप में चुना।