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आखिर सोने और चांदी के ही सिक्के क्यों बनाए गए, बड़ी दिलचस्प है इसकी वजह

Wed, 12 Sep 2018 11:21 AM IST
बीबीसी हिंदी
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Gold and Silver Coins
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हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती, लेकिन वो क्या वजह रही होगी कि प्राचीन काल में सोने और चांदी को मुद्रा के रूप में चुना गया होगा? ये महंगे जरूर हैं लेकिन बहुत सारी चीजें इनसे भी महंगी हैं। फिर इन्हें ही संपन्नता और उत्कृष्टता मापने का पैमाना क्यों माना गया?

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बीबीसी इन सवालों के जवाब तलाशते हुए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के आंद्रिया सेला के पास पहुंचा। आंद्रिया इनऑर्गेनिक केमेस्ट्री के प्रोफेसर हैं। उनके हाथ में एक पीरियॉडिक टेबल था। आंद्रिया सबसे अंत से शुरू करते हैं।

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ये नाम इसलिए हो गए बाहर

Gold Silver
दाहिने हाथ की तरफ जो रासायनिक तत्व थे वो चमकीले ब्लू घेरे में थे। ये रासायनिक रूप से स्थिर तत्व होते हैं। ये बदलते नहीं हैं और यही इसकी खासियत होती है। लेकिन एक परेशानी भी है कि ये नोबल गैस समूह के होते हैं। ये गैस गंधहीन और रंगहीन होती हैं, जिनकी रासायनिक प्रतिक्रिया की क्षमता कम होती है।

यही कारण है कि इन्हें मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाना आसान नहीं होता। क्योंकि इन्हें लेकर घूमना एक चुनौती होगा। चूंकि ये रंगहीन होते हैं, इसलिए इसे पहचानना भी मुश्किल होता और गलती से इनका कंटेनर खुल जाए तो आपकी कमाई हवा हो जाती।

मरकरी और ब्रोमीन पर नहीं कर सकते भरोसा

mercury and bromine
इस श्रेणी में मरकरी और ब्रोमीन तो हैं पर वे लिक्विड स्टेट में हैं और जहरीले होते हैं। दरअसल सभी मेटलॉइड्स या तो बहुत मुलायम होते हैं या फिर जहरीले। पीरियॉडिक टेबल गैस, लिक्विड और जहरीले रासायनिक तत्वों के बिना कुछ ऐसा दिखेगा।

ऊपर के टेबल में सभी नॉन-मेटल तत्व भी गायब हैं, जो गैस और लिक्विड तत्व के आसपास थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन नॉन-मेटल को न तो फैलाया जा सकता है और न ही सिक्के का रूप दिया जा सकता है। ये दूसरे मेटल के मुकाबले मुलायम भी नहीं होते हैं, इसलिए ये मुद्रा बनने की दौड में पीछे रह गए।
 

इन्हें आप अपनी जेबों में लेकर नहीं घूम सकते

Periodic Table
सेला ने अब हमारा ध्यान पीरियोडिक टेबल की बाईं ओर खींचा। ये सभी रासायनिक तत्व ऑरेंज कलर के घेरे में थे। ये सभी मेटल हैं। इन्हें मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है पर परेशानी यह है कि इनकी रासायनिक प्रतिक्रिया क्षमता बहुत ज्यादा होती है।

लिथियम जैसे मेटल इतने प्रतिक्रियाशील होते हैं कि जैसे ही ये हवा के संपर्क मे आते हैं, आग लग जाती है। अन्य दूसरे खुरदरे और आसानी से नष्ट होने वाले हैं। इसलिए ये ऐसे नहीं हैं, जिसे आप अपनी जेबों में लेकर घूम सकें।

इसके आसपास के रासायनिक तत्व प्रतिक्रियाशील होने की वजह से इसे मुद्रा बनाया जाना मुश्किल है। वहीं, एल्कलाइन यानी क्षारीय तत्व आसानी से कहीं भी पाए जा सकते हैं। अगर इसे मुद्रा बनाया जाए तो कोई भी इसे तैयार कर सकता है। अब बात करें पीरियॉडिक टेबल के रेडियोएक्टिव तत्वों की तो इन्हें रखने पर नुकसान हो सकता है।

तो इस तरह हुई सोने और चांदी की जीत

सोने के बिस्कुट बरामद - फोटो : अमर उजाला
ऊपर की तस्वीर में बचे रासायनिक तत्वों की बात करें तो ये रखने के हिसाब से सुरक्षित तो हैं लेकिन ये इतनी मात्रा में पाए जाते हैं कि इसका सिक्का बनाना आसान हो जाएगा, जैसे कि लोहे के सिक्के। मुद्रा के रूप में उस रासायनिक तत्व का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जो आसानी से नहीं मिलते हों।

अब अंत में पांच तत्व बचते हैं जो बहुत मुश्किल से मिलते हैं। सोना(Au), चांदी(Ag), प्लैटिनम(Pt), रोडियम(Rh) और पलेडियम(Pd)। ये सभी तत्व कीमती होते हैं। इन सभी में रोडियम और प्लेडियम को मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता था लेकिन इनकी खोज उन्नीसवीं शताब्दी में की गई थी, जिसकी वजह से प्राचीन काल में इनका इस्तेमाल नहीं किया गया था। तब प्लैटिनम का इस्तेमाल किया जाता था पर लेकिन इसे गलाने में तापमान को 1768 डिग्री तक ले जाना होता है। इस वजह से मुद्रा की लडाई में सोने और चांदी की जीत हुई।
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चांदी से सोना कैसे निकला आगे

silver
चांदी का इस्तेमाल सिक्के के रूप में तो हुआ पर परेशानी यह थी कि हवा में मौजूद सल्फर से प्रतिक्रिया कर कुछ काली पड जाती है। चांदी की तुलना में सोना आसानी से नहीं मिलता है और यह काला भी नहीं पडता।

सोना ऐसा तत्व है जो आर्द्र हवा में हरा नहीं होती है। सेला कहते हैं कि यही वजह है मुद्रा की दौड में सोना सबसे आगे और अव्वल रहा। वो कहते हैं कि यही वजह है कि हजारों सालों के प्रयोग और कई सभ्यताओं ने सोने को मुद्रा के रूप में चुना।
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