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आखिर समुद्र का पानी खारा क्यों होता है जबकि नदियों का नहीं? रहस्य है बड़ा गहरा

Thu, 28 May 2020 03:22 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ये तो आप जानते ही होंगे कि समुद्र की सतह से ही किसी जगह की ऊंचाई मापी जाती है यानी यह पृथ्वी पर सबसे निचली सतह है और इसी कारण नदियों का पानी भी आकर अंततः समुद्र में ही मिलता है। यह क्रम कोई 100-200 पहले का नहीं है बल्कि ऐसा तो हजारों-लाखों साल से होता आ रहा है, लेकिन क्या कभी आपने ये ध्यान दिया है कि आखिर समुद्र का पानी ही खारा (नमकीन) क्यों होता है, नदियों का पानी क्यों नहीं? चलिए इस रहस्य के बारे में जान लेते हैं, लेकिन उससे ये जानना जरूरी है कि आखिर समुद्र का जन्म कैसे हुआ और कब हुआ? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि समुद्र का जन्म आज से करीब 50 करोड़ साल से 100 करोड़ साल के बीच हुआ होगा, लेकिन इसका अनुमान लगाना मुश्किल है कि आखिर धरती के विशालकाय गड्ढे पानी से कैसे भर गए और इन विशालकाय गड्ढों का निर्माण हुआ कैसे। हालांकि ऐसा माना जाता है कि जब पृथ्वी का जन्म हुआ तो वह आग का एक विशाल गोला थी। जब यह धीरे-धीरे ठंडी होने लगी तो चारों तरफ गैस के बादल फैल गए। यही गैस के बादल जब भारी हो गए तो वो बारिश के रूप में बरस पड़े। लाखों साल तक ऐसे ही बारिश होती रही, जिससे धरती के विशालकाय गड्ढों में पानी भर गए, जिसे आज हम समुद्र के नाम से जानते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
समुद्र के पानी में जीवों की लाखों प्रजातियां रहती है। इनमें कुछ विशालकाय जीव भी होते हैं, जैसे- व्हेल मछली, शार्क मछली, ऑक्टोपस, एनाकोंडा सांप आदि। वैसे तो समुद्रों के बारे में अभी पूरी तरह वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए हैं। ऐसे में उसके कई रहस्य अब भी अनसुलझे ही हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आपको शायद ही ये पता हो कि नदियों और झरनों में भी समुद्र का ही पानी रहता है। दरअसल, समुद्र से भाप उठती है, जिससे बादलों का निर्माण होता है और इसी से बारिश होती है। यही पानी नदियों और झरनों में जाता है। इसमें लवण भी घुले होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा कम होती है, इसलिए नदी और झरनों का पानी अक्सर मीठा होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जब बारिश का पानी वापस समुद्र में पहुंचता है तो वहां थोड़े-थोड़े करके लवण जमा होते जाते हैं। हजारों-लाखों साल तक समुद्र में लवणों के जमा होने के कारण उसका पानी खारा हो जाता है। ये लवण हैं सोडियम और क्लोराइड, जिससे नमक का निर्माण होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
समुद्र का पानी खारा होने के पीछे एक पौराणिक कहानी भी है। कहते हैं कि एक बार समुद्र देव ने देवी पार्वती से विवाह करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन चूंकि माता पार्वती पहले ही भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं, इसलिए उन्होंने समुद्र देव के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इससे समुद्र देव क्रोधित हो गए और माता पार्वती के सामने ही भगवान शिव को भला-बुरा कहने लगे। इसपर माता पार्वती गुस्सा हो गईं और उन्होंने उन्हें श्राप दिया कि जिस मीठे पानी पर तुम्हें इतना अभिमान है और दूसरों की बुराई करते हो, वही पानी आज से खारा (नमकीन) हो जाए, जिससे कोई पी न पाए। 
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