फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या होगा अगर दुनिया से एक दिन समुद्र का नामोनिशान मिट जाए? हैरान कर देंगी ये बातें

Thu, 23 Jan 2020 09:18 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हमारी धरती के 71 फीसदी हिस्से पर समंदर फैले हुए हैं। इनमें दुनिया में मौजूद कुल पानी का 97 प्रतिशत हिस्सा है। समंदर के जानकार कहते हैं कि इन में 1.35 अरब क्यूबिक किलोमीटर पानी मौजूद है। अब तक इंसान ने समुद्र के केवल पांच फीसदी हिस्से को ही खंगाला है। समंदर, हमारी पृथ्वी पर जीवन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। यहीं से धरती पर जिंदगी के विकास की बुनियाद पड़ी थी। अब तक समुद्रों में मौजूद जीवों की दो लाख 30 हजार प्रजातियों का ही पता लगाया जा सका है, लेकिन जानकार कहते हैं कि चूंकि हम ने अब तक समुद्र का केवल पांच फीसदी हिस्सा ही खंगाला है, तो इस में मौजूद जीवों की प्रजातियों की संख्या 20 लाख से भी ज्यादा हो सकती है। 

विज्ञापन

2 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
समुद्रों से ही दुनिया का मौसम तय होता है। बारिश होती है। गर्मी पड़ती है। अंतरिक्ष में चारों तरफ सिर्फ काला रंग ही दिखता है। इस में सबसे अलग दिखती है हमारी धरती। नीली-हरी धरती का ये रंग समंदर की वजह से ही है। लेकिन, क्या हो अगर अचानक एक दिन दुनिया से समुद्रों का अस्तित्व ही खत्म हो जाए? 
विज्ञापन

3 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक मोटे अंदाजे के मुताबिक, करीब चार करोड़ लोगों की रोजी समंदर से चलती है। इनमें से साढ़े तीन करोड़ के करीब लोग समुद्र में मछली मार कर अपनी जीविका कमाते हैं। तो बाकी के पचास लाख लोग जहाजों और क्रूज शिप के माध्यम से रोजगार पाते हैं। समुद्र का पानी अचानक से उड़ जाने से उस वक्त समंदर में मौजूद जहाज करीब पौने चार किलोमीटर की गहराई में चले जाएंगे, क्योंकि समुद्रों की औसत गहराई इतनी ही है। ये भी हो सकता है कि कुछ खास जगहों पर मौजूद जहाज इससे भी ज्यादा गहराई में चले जाएं। ऐसा होने की सूरत में जो जहाज किनारों के पास होंगे, उन्हें तो शायद मामूली नुकसान उठाना पड़े, लेकिन गहरे समंदर में तैर रहे जहाज अचानक से बहुत गहराई में गिरेंगे, तो उन्हें बहुत क्षति उठानी पड़ेगी।

4 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
समुद्र अचानक सूखे, तो उन में रहने वाले अरबों की तादाद में जीवों की दम घुटने से मौत हो जाएगी। इनमें व्हेल-डॉल्फिन और शार्क मछली से लेकर हजारों नस्लों के छोटे जीव शामिल होंगे। अंदाजा है कि इन जीवों की लाशों का वजन पांच से 10 अरब टन हो सकता है। जब ये सड़ने लगेंगे, तो इनकी बदबू का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। 
विज्ञापन

5 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
समुद्रों का पानी खत्म होने पर करीब 1.3 अरब वर्ग किलोमीटर जगह खाली होगी, जिसे भरने के लिए वायुमंडल की हवा उस तरफ भागेगी। इससे वायुमंडल का घनत्व अचानक से बहुत कम हो जाएगा। इस वजह से ऊंचे ठिकानों में रहने वाले लोगों के लिए तो सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। इन जगहों से हवा का दबाव कम होगा, तो तापमान भी बहुत तेजी से गिरेगा। 
विज्ञापन

6 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
समुद्रों में दुनिया का 97 प्रतिशत पानी मौजूद है। ये अचानक से गायब हुआ तो प्रकृति का संतुलन ही बिगड़ जाएगा। वायुमंडल की बनावट बदलेगी। मौसमों का चक्र भी पटरी से उतर जाएगा। आखिर समुद्रों में मामूली नहीं बल्कि 13 अरब घन किलोमीटर से भी ज्यादा पानी मौजूद है, जबकि हमारी पृथ्वी पर मीठे पानी की तादाद केवल 10 करोड़ 64 लाख घन किलोमीटर के करीब है। मीठे पानी के इन स्रोतों को भी समुद्र से ही पानी मिलता है। समंदर नहीं रहे, तो बादल लापता हो जाएंगे। इन के न होने से पानी नहीं बरसेगा, तो मीठे पानी के स्रोतों को भी ताजा पानी नहीं मिलेगा।
विज्ञापन

7 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
समंदर और बादल न रहे, तो धरती को सूरज की भयंकर किरणों का सामना करना पड़ेगा। इससे भूमध्य रेखा के आस-पास तो मानो आग ही लग जाएगी। साथ ही ग्लेशियर और बर्फीले पहाड़ भी पिघल जाएंगे। इन में जमा करीब ढाई करोड़ वर्ग किलोमीटर पानी भी पिघल जाएगा। 

8 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
समुद्र में मौजूद काई और इस तरह के पौधे आज की तारीख में धरती की कुल दो तिहाई ऑक्सीजन पैदा करते हैं। ये वायुमंडल में मौजूद कार्बन को भी सोखते हैं। समंदर न रहे, तो ये पौधे भी खत्म हो जाएंगे। इससे धरती पर ऑक्सीजन की मात्रा अचानक से कम हो जाएगी और कार्बन डाई ऑक्साइड की तादाद बड़ी तेजी से बढ़ेगी। 

9 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बारिश नहीं होगी, तो हरियाली कम होगी। तापमान बढ़ेगा, तो प्रेयरी, टुंड्रा और दूसरे बड़े जंगलों में भयंकर आग लग जाएगी। इनसे और कार्बन डाई ऑक्साइड पैदा होगी और ऑक्सीजन कम होगी। समंदर खत्म होने से खाने-पीने के संसाधनों की भारी कमी हो जाएगी। बचे हुए इंसानों में इसके लिए झगड़े होंगे। जो ताकतवर होगा वो इन सीमित संसाधनों का उपभोग कर लेगा। कुल मिलाकर हालात ऐसे बनेंगे कि हमारी धरती भी बहुत से ग्रहों की तरह जीवन के लायक नहीं रह जाएगी। तब शायद कुछ छोटे-छोटे बैक्टीरिया और दूसरे ऐसे ही जीव धरती पर बचेंगे। 

10 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
लंबे समय तक बिना समुद्र के रहने पर धरती के पहाड़ों का आकार बढ़ जाएगा, क्योंकि उनका आकार घटाने वाले ग्लेशियर, बारिश और हवा की तुर्शी मौजूद ही नहीं होगी। जो गर्म हवा होगी, उसकी वजह से धरती बेहद बदरंग हो जाएगी, कुरूप हो जाएगी। तब अजीब आकार की चट्टानें और पहाड़ ही दिखेंगे। 
विज्ञापन

11 of 11
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बर्फ और समंदर का पानी न होने से धरती की ऊपरी परत पतली हो जाएगी। इससे ज्वालामुखी विस्फोट ज्यादा और बार-बार होने लगेंगे। इससे धरती का वजन घट जाएगा। ऐसे ही हालात बने रहे, तो दसियों लाख बरस बाद सूरज का चक्कर लगाने वाली धरती की कक्षा भी बदल जाएगी। तब पृथ्वी सूरज से दूर चली जाएगी और यहां भयंकर ठंड पड़ने लगेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें