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क्या मिल गई दूसरी दूनिया? पहली बार मिला सीधा रेडियो सिग्नल, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा

Thu, 24 Sep 2026 07:06 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

सौर मंडल के बाहर खोज गए एक ग्रह से सीधे रेडियो सिग्नल मिल रहा है। इसका वैज्ञानिको ंने पता लगाया है। उनका कहना है कि पहली बार  सौर मंडल के बाहर का ग्रह से सीधे आने वाले रेडियो सिग्नल की खोज की गई है। 
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क्या मिल गई दूसरी दूनिया? पहली बार मिला सीधा रेडियो सिग्नल - फोटो : AI
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विस्तार
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सौर मंडल के बाहर ग्रहों की तलाश कर रहे वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। सौर मंडल के बाहर एक ग्रह से सीधे रेडियो सिग्नल मिल रहा है, जिसका वैज्ञानिकों ने पता लगाया है। इस खोज से पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना वाले ग्रह को लेकर खगोलविदों के बीच एक नई उम्मीद जगी है। अभी तक पृथ्वी के बाहर जीवन का कोई सबूत नहीं मिला है। हालांकि, वैज्ञानिकों लगातार संकेतों की तालश में लगे हैं। नई खोज से इस दिशा में नए रास्ते खुल सकते हैं। 

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हार्वर्ड और स्मिथसोनियन के सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन की टीम ने यह बड़ी खोज की है। इस टीम ने पहली बार सौर मंडल के बाहर के ग्रह (एक्सोप्लैनेट) से सीधे आने वाले रेडियो सिग्नल की खोज की है। खास बात है कि यह एलियंस से संपर्क करने की कोशिश नहीं है। इससे पहले ग्रहों वाले सिस्टम में रेडियो सिग्नल की खोज की गई थी, लेकिन यह पक्का नहीं कहा जा सकता था कि वे सिग्नल उन्ही ग्रहों से आ रहे हैं या उनके चारों तरफ घूमने वाले तारों से। 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोफिजिक्स की प्रोफेसर सुजैन एग्रेन ने बताया कि खगोलविद कुछ समय सौर मंडल के बाहर के ग्रहों से रेडियो सिग्नल की खोज कर रहे हैं। पहले भी कुछ संकेत खोजे गए थे, लेकिन पहली बार पक्के सबूत के साथ सिग्नल की खोज हुई है। इससे आने वाले समय में ऐसी और भी खोजों का रास्ता खुलेगा।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिग्नल एक्सोप्लैनेट के ऑरोरा से आ रहा है। ऑरोरा का निर्माण चार्ज्ड पार्टिकल्स के वायुमंडलीय और चुंबकीय क्षेत्र की स्थितियों के साथ से मिलने और उर्जा छोड़ने से होता है। पृथ्वी पर उत्तरी और दक्षिणी रोशनी के रूप में ऑरोरा दिखाई देते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सौर मंडल के ग्रहों और कुछ अल्ट्रा-कूल ड्वार्फ में ऑरोरल रेडियो बर्स्ट दिखाई दिए हैं। लेकिन पहले कभी सौर मंडल के बाहर के ग्रह से रेडियो सिग्नल का पता स्पष्ट तौर पर नहीं लगाया गया है। ग्रह ही इस सिग्नल का स्त्रोत है, न कि उसका होस्ट स्टार है। 

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शोधकर्ताओं की टीम का कहना है कि 0.85 से 3.5 GHz की फ्रीक्वेंसी पर तेजी घटने वाली घटना, कई बार दोहराए जाने वाले और बहुत ज्यादा तेज रेडियो तरंगों के झटके साथ-साथ होने वाला एमिशन देखा है। यह वही फ्रीक्वेंसी है, जिन्हें 2025 और 2026 में चार अलग-अलग मौकों पर दक्षिण अफ्रीका में MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप ऐरे से कवर किया था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड पृथ्वी के मुकाबले हजारों गुना ज्यादा मजबूत है, जो अपनी धुरी पर घूमने में सिर्फ 8-9 घंटे लेता है। यह बहुत विशाल है,जिसका द्रव्यमान बृहस्पति से 10 गुना है।

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