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एक ऐसी झील, जहां 'खत्म हो जाती है दुनिया', रहस्यों से भरा है यहां का चर्च

Thu, 02 Jan 2020 01:31 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बोहीन झील, स्लोवेनिया - फोटो : Social media
'स्लोवेनिया में एक बात मशहूर है, बोहीन में हम दुनिया से एक या दो दिन पीछे हो जाते हैं।' पर्यटकों के लिए राजधानी ल्युब्लियाना से एक घंटे की दूरी पर बोहीन झील के पास हाइक एंड बाइक सर्विस चलाने वाली ग्रेगा सिल्क कहती हैं कि पहले तो वहां लोग बाकी दुनिया से खासा पीछे रहते थे। सचमुच ये झील ऐसी जगह है, जहां आप कहीं खो जाते हैं।
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बोहीन झील के पास बसा उकानक कस्बा - फोटो : Social media
शताब्दियों से भेड़ और बकरियों चराने वालों का ये इलाका स्लोवेनिया के बाकी हिस्सों से कटा हुआ रहता है। यहां तक पहुंचने वाली सड़कें खस्ताहाल हैं। झील की दूसरी तरफ बसा हुआ कस्बा उकानक कहलाता है। जूलियन एल्प्स पहाड़ियों में स्थित उकानक का मतलब होता है- 'यहां दुनिया खत्म हो जाती है।' यहां तक पहुंचने में कई सप्ताह लग जाते हैं। 1906 में ऑस्ट्रो-हंगेरियन इम्पायर के जमाने में पर्वतों में विस्फोट के जरिए सुरंगें बनाई गईं। पानी के रास्ते के साथ साथ रेलवे लाइन भी वहां तक पहुंचा। इसके जरिए खनन वाले उत्तरी शहर जसेनिक को दक्षिण में ट्रिस्ट पोर्ट से जोड़ा गया। 
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बोहीन क्षेत्र में बने लकड़ियों के घर - फोटो : Social media
बोहीन का क्षेत्र भूगौलिक तौर पर काफी दूर दराज का इलाका है। यह कई दशकों तक कम्युनिस्ट देश यूगोस्लाविया का हिस्सा रहा। स्लोवेनिया 1991 में स्वतंत्र हुआ और यह 2007 में यूरोजोन में शामिल हुआ, लेकिन दुनिया के इस हिस्से में जीवन की गति ने तेज रफ्तार नहीं पकड़ी है। इस इलाके में आज भी लकड़ियों के घर, बिखरे हुए गांव, चरवाहे मिलते हैं। 

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बोहीन झील, स्लोवेनिया - फोटो : Social media
हर साल सितंबर में, गांववाले इस झील के तटों पर जमा होते हैं और परंपरागत तौर पर नाचते गाते हैं। ऐसे समय में सिल्क और मैं साइकिल से इस इलाके में पहुंचे। हमें इस इलाके में महज एक या दो साइकिल ही नजर आए। इस इलाके में कब पुल खत्म हो जाता है और पानी शुरू हो जाता है, पता ही नहीं चलता। इलाका बेहद शांत है। 
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बोहीन झील के पास स्थित चर्च - फोटो : Social media
रिबकेव लॉज के पास हमने साइकिल चलाना छोड़ कर दूधिया रंग की इमारत सेंट जॉन बैपटिस्ट चर्च को गौर से देखना शुरू किया। सिल्क ने बताया, 'ये बहुत ही रहस्यपूर्ण चर्च है। कोई नहीं जानता कि यह कितनी पुरानी है। यह 15वीं शताब्दी से पहले बनी होगी। इस चर्च के आंतरिक भित्तिचित्र का कोई मतलब नहीं जानता।' इसमें सफेद शैतान एडम और इव के बेटे केन के कंधे पर बैठा हुआ है, जबकि एंजिल्स के वैंपायर की तरह नुकीले दांत दिखाए गए हैं। सिल्क बताती हैं कि परंपरागत मान्यताओं में ईसाई हठधर्मिता के मेल से ऐसा कुछ मिश्रण बन गया होगा। 
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बोहीन झील के पास बना डेविल्स ब्रिज - फोटो : Social media
चर्च के निकट सिलेंडर के आकार की पीले रंग की मूर्ति हैं जो सुनहरे सींगों वाले हिरण की तस्वीर है। दोपहर की रोशनी में यह एकदम वास्तविक हिरण जैसा लगता है। चर्च से 20 मिनट तक साइकिल चलाने के बाद हम डेविल्स ब्रिज तक पहुंचते हैं। आम लोगों में इस पुल के बारे में ये कहानी प्रचलित है कि ये पुल शैतान ने खुद बनाया और इसको शुरू करने की कीमत ये तय की कि इसे पार करने वाले पहले जीव की आत्मा को वह ले जाएगा। इस कहानी के मुताबिक गांववालों ने चालाकी दिखाते हुए एक कुत्ते को सबसे पहले ये पुल पार करा दिया। 
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उकानक, स्लोवेनिया - फोटो : Social media
यहां पर हर इलाके की अपनी कहानी है। जितनी आपकी कल्पना काम कर सकती है, उतनी कहानियां हैं। इलाके में काफी जंगली फूल और पौधे भी हैं। सफेद बादल और नीले आसमान के बीच ये इलाका वाकई में ऐसा है जहां आकर आप सब कुछ भूल जाते हैं। सिल्क ने बताया कि अगाथा क्रिस्टी भी यहां आती रहती थीं, लेकिन उन्होंने इस जगह पर कुछ नहीं लिखा। क्रिस्टी अकेली नहीं थीं, लेकिन अस्तित्तवादी दार्शनिक जां पॉल सात्र भी उकानक आने वाले नियमित पर्यटकों में शामिल थे। सिल्क के मुताबिक एक अस्तित्ववादी लेखक का 'दुनिया के आखिरी छोर' पर मौजूद शहर तक जाना तर्कसंगत लगता है। 
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केबल कार - फोटो : Social media
माउंट वोगल एक तरह से स्की रिसॉर्ट है। यहां केबल कार के जरिए आप एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच सकते हैं। हालांकि केबल कार के लिए कई बार लोगों को छह छह घंटे तक इंतजार करना होता है। केबल कार से यात्रा करते हुए नीचे का इलाका काफी खूबसूरत दिखता है। केबल कार से निकलने पर सिल्क अपने दो दोस्तों से मिलीं, वे टूर गाइड ही थे। उनमें से एक ने कहा, 'काफी चुनौतीपूर्ण जीवन है। मैं इसे छोड़ रहा हूं। कल से फैक्ट्री जा रहा हूं।' बोहीन वैसे तो स्लोवेनिया की राजधानी से महज एक घंटे की दूरी पर है, लेकिन हम यहां ऐसा महसूस कर रहे थे मानो हम कहीं नहीं हैं! ना समय का ख्याल था और ना मौसम का, ये दिलकश अनुभव था। 
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