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पाकिस्तान का वो प्रधानमंत्री, जिसे रात के दो बजे फांसी पर लटकाया गया

Tue, 18 Feb 2020 01:50 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फांसी पर लटकने वाला पाकिस्तानी प्रधानमंत्री - फोटो : Amar Ujala
किसी भी देश में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का ओहदा बाकी सभी ओहदों से बड़ा होता है। फांसी तो दूर उनपर कोई भी इल्जाम लगाने से पहले आदमी 100 बार सोचता है। लेकिन पाकिस्तान में एक ऐसा प्रधानमंत्री हुआ है, जिसे फांसी पर लटका दिया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह शख्स पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने से पहले वहां का राष्ट्रपति भी रह चुका था। 

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जुल्फिकार अली भुट्टो - फोटो : Social media
पाकिस्तान के इस पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का नाम है जुल्फिकार अली भुट्टो। वह 20 दिसंबर 1971 से 13 अगस्त 1973 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे थे। इसके बाद 14 अगस्त 1973 से पांच जुलाई 1977 तक उन्होंने देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला था। 
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जुल्फिकार अली भुट्टो - फोटो : Social media
जुल्फिकार अली भुट्टो को पाकिस्तान के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक माना जाता था, लेकिन साल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक के नेतृत्व में सेना ने तख्तापलट कर दिया। इसके बाद तीन सितंबर 1977 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनपर विपक्षी नेता की हत्या का आरोप लगा था। हालांकि वो खुद हत्या में शामिल होने की बात से हमेशा इनकार करते रहे। 

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जुल्फिकार अली भुट्टो - फोटो : Social media
18 मार्च 1978 को जुल्फिकार अली भुट्टो की जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला आया और लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई। जुल्फिकार अली भुट्टो ने अपनी जिंदगी के आखिरी समय रावलपिंडी जेल में गुजारे। यही से उन्होंने फैसले के खिलाफ पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की, लेकिन अदालत ने उनकी अपील ठुकरा दी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तीन अप्रैल 1979 की रात दो बजकर चार मिनट पर जुल्फिकार अली भुट्टो को रावलपिंडी जेल में ही फांसी पर लटका दिया गया। वैसे आमतौर पर फांसी की सजा सुबह के समय दी जाती है, लेकिन यह फांसी रात में ही दे दी गई थी। वह करीब आधे घंटे तक फांसी के फंदे पर लटके रहे। इसके बाद डॉक्टर ने भुट्टो की जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिर उनके शव को नीचे उतारा गया और फिर उन्हें दफनाने की तैयारी शुरू की गई। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कहते हैं कि जब जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटकाया गया, उस समय पाकिस्तान के लोगों को यह बात पता ही नहीं थी। बीबीसी के मुताबिक, उनकी मौत के घंटों बाद लोगों को पता चला जब एक स्थानीय अखबार में इसके बारे में छपा। फिर यह खबर पूरी दुनिया में तेजी से फैल गई।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
जुल्फिकार अली भुट्टो जब जेल में बंद थे, उस समय रावलपिंडी जेल में खुफिया अधिकारी रहे कर्नल रफीउद्दीन ने एक किताब लिखी है, जिसका नाम है 'भुट्टो के आखिरी 323 दिन'। इस किताब में उन्होंने लिखा है कि फांसी पर लटकाए जाने के कुछ देर बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एक फोटोग्राफर ने उनके गुप्तांगों की फोटो खींची थी। दरअसल, यह फोटो इसलिए खींची गई थी, ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि भुट्टो का इस्लामी रीति-रिवाज से खतना हुआ था नहीं। हालांकि बाद में पाकिस्तानी प्रशासन का यह संदेह दूर हो गया। 
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जुल्फिकार अली भुट्टो - फोटो : Social media
साल 2018 में जुल्फिकार अली भुट्टो की मौत के 39 साल बाद उन्हें फांसी दिए जाने पर एक बड़ा फैसला आया था। सिंध हाईकोर्ट ने भुट्टो को शहीद का दर्जा देते हुए उनके नाम के आगे 'शहीद' जोड़ा है। अदालत का का कहना था कि भुट्टो तानाशाही शासन का शिकार हुए थे। 
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