प्रतीकात्मक तस्वीर
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जुल्फिकार अली भुट्टो जब जेल में बंद थे, उस समय रावलपिंडी जेल में खुफिया अधिकारी रहे कर्नल रफीउद्दीन ने एक किताब लिखी है, जिसका नाम है 'भुट्टो के आखिरी 323 दिन'। इस किताब में उन्होंने लिखा है कि फांसी पर लटकाए जाने के कुछ देर बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एक फोटोग्राफर ने उनके गुप्तांगों की फोटो खींची थी। दरअसल, यह फोटो इसलिए खींची गई थी, ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि भुट्टो का इस्लामी रीति-रिवाज से खतना हुआ था नहीं। हालांकि बाद में पाकिस्तानी प्रशासन का यह संदेह दूर हो गया।