नासा 5 या 6 फरवरी 2026 को इस मिशन को लॉन्च कर सकता है। अगर किसी कारण देरी होती है, तो अप्रैल 2026 तक मिशन को लॉन्च करेगा। अमेरिका के फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B से यह मिशन भेजा जाएगा। यहीं से अपोलो मिशन भी लॉन्च किया गया था।
रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट
इस मिशन को रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) से लॉन्च किया जाएगा। यह ब्लॉक-1 वर्जन में होगा। SLS चंद्रमा तक ओरियन स्पेसक्राफ्ट, एस्ट्रोनॉट्स और कार्गो को एक साथ भेज सकता है। स्पेसक्राफ्ट का नाम ओरियन है, जिसमें चार लोगों के बैठने के लिए है। इसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और कम्युनिकेशन की आधुनिक तकनीक है। ओरियन चंद्रमा के आसपास घूमकर लौट आएगा।
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जानिए कौन-कौन हैं अंतरिक्ष यात्री?
नासा के Artemis-II मिशन में चांद पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स में मिशन विशेषज्ञ कनाडाई स्पेस एजेंसी के जेरेमी हैनसेन, मिशन विशेषज्ञ नासा की क्रिस्टीन कोच, नासा के पायलट विक्टर ग्लोवर और नासा के कमांडर रीड वाइजमैन शामिल हैं। यह चारों अंतरिक्ष यात्री आर्टेमिस-2 मिशन का हिस्सा होंगे। यह मिशन चांद के चारों तरफ लगाएगा और फिर धरती वापस आएगा।
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कितने दिन का है मिशन?
यह मिशन करीब 10 दिन का है और चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। पहले यह पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और चंद्रमा के पीछे से होकर वापस आएगा। चंद्रमा से सबसे करीब की दूरी करीब 7400 किमी होगी। चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं होगी, सिर्फ घूमकर वापस आएगा।
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क्या है उद्देश्य?
इंसानों के साथ स्पेसक्राॅफ्ट ओरियन और SLS की टेस्टिंग और लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन आदि की जांच करना है। यह आर्टेमिस-3 मिशन (2027 में चंद्रमा पर उतरने) की तैयारी है। इस मिशन से चंद्रमा पर स्थाई बेस बनाने और मंगल जाने का रास्ता तैयार होगा।