ऐसी ही एक जुनूनी महिला हैं रेणु शर्मा, जो कोलकाता में एक्यूट ब्रॉन्काइटिस का इलाज करा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्र निर्माण में वो अपनी भागीदारी दिखाने से नहीं चूकीं। दरअसल, ब्रॉन्काइटिस से पीड़ित रेणु बिना ऑक्सीजन सपोर्ट सांस नहीं ले पाती हैं।
59 वर्षीय रेणु मिश्रा ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ 330 किलोमीटर की यात्रा कर कोलकाता से दुमका (झारखंड) अपना कीमती वोट डालने पहुंची थीं। उनका कहना है कि मैं जब तक ज़िंदा हूं, राष्ट्रनिर्माण में योगदान के लिए अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करती रहूंगी।
रेणु मिश्रा दुमका के उन्नत खजुरिया मध्य विद्यालय में ने प्रधानाध्यापक के रूप में अपनी सेवा दी है। सांस लेने में परेशानी की वजह से उन्हें 23 जनवरी को दुमका के विश्व स्वास्थ्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके इस जुनून को सफल बनाने में अस्पताल प्रशासन ने भी बेहतरीन भूमिका निभाई और सभी सुविधाओं से लैस एंबुलेंस के जरिए उन्हें वोट डालने के लिए भेजा गया था।