फ्लोरेसेंस माइक्रोस्कोप
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वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान इस जीव को फ्लोरेसेंस माइक्रोस्कोप से देखा, जिसमें उन्हें माइटोकॉन्ड्र्रियल डीएनए नहीं दिखा। इसके बाद यह समझ में आ गया कि यह दुनिया का पहला ऐसा जीव है, जिसे जीने के लिए सांस लेना जरूरी नहीं है। हालांकि साल 2010 में भी इटली के शोधकर्ताओं को इसी तरह का एक जीव मिला था, जिसमें साफतौर पर माइटोकॉन्ड्र्रियल डीएनए नहीं दिखा था। हालांकि उसकी ऊर्जा का स्रोत हाइड्रोजन सल्फाइड था, लेकिन नए मिले इस जीव को तो हाइड्रोजन सल्फाइड की भी जरूरत नहीं है। निश्चित ही यह शोध वैज्ञानिकों को विज्ञान की एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।