आज से ठीक एक साल पहले 27 फरवरी को बालाकोट स्ट्राइक का बदला लेने भारत के वायुसीमा में घुसे पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को हमारे वीर वायुयोद्धाओं ने खदेड़ दिया था। इसी दौरान विंग कमांडर अभिनंदन ने पुरानी तकनीक वाले अपने मिग 21 विमान से पाकिस्तान के आधुनिक माने जाने वाले एफ-16 को मार गिराया था।
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Abhinandan Varthaman
- फोटो : Social Media
पाकिस्तानी एफ-16 जेट को मार गिराने वाले मिग-21 बाइसन को लगातार अपग्रेड किया जाता रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मिग-21 की खासियत क्या है और क्यों इसे उड़ने वाला ताबूत भी कहा जाता रहा है। आइए जानते हैं भारत के इस फाइटर जेट की खूबियां:
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वायुसेना प्रमुख के साथ अभिनंदन
- फोटो : PTI
युद्ध में सबसे ज्यादा इस्तेमाल
भारत के पास कई लड़ाकू विमान हैं। लेकिन ज्यादातर मौकों पर मिग-21 का इस्तेमाल किया है। यह भारत का एक सबसे पुराना फाइटर जेट है। इस फाइटर जेट का इस्तेमाल दुश्मन को सीमा पर रोकने के लिए होता है।
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मिग 21 बायसन
- फोटो : IAF
बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से एफ-16 लड़ाकू विमान आए वैसे ही भारत ने अपने मिग-21 रवाना कर दिए। जिसके बाद उन्होंने कुछ ही मिनटों में सीमा पर पहुंचकर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को खदेड़ दिया।
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मिग 21
- फोटो : Social Media
जानिए क्या है मिग-21 बाइसन की खासियत
यह फाइटर जेट सोवियत जेट का एक अपग्रेडेड वर्जन है। मिग-21 बाइसन शॉर्ट रेंज और मीडियम रेंज एयरक्राफ्ट मिसाइलों से हमला करने में सक्षम है।
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मिग-21 लड़ाकू विमान
- फोटो : ANI
अपग्रेड होने के बाद यह पाकिस्तानी एफ-16 जैसे फाइटर जेट को टक्कर दे सकता है। पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग-21 ने अहम भूमिका निभाई थी।
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Wing Commander Abhinandan Varthaman MIG-21
- फोटो : Social Media
मिग-21 बाइसन ने वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमानों का भी सामना किया था। भारतीय वायुसेना ने साल 2013 में मिग-21 के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया था।
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मिग-21 विमान (फाइल फोटो)
हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 1967 में सोवियत संघ से मिग-21 बनाने का लाइसेंस मिला था। मिग विमान हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है।
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मिग 21
- फोटो : Social Media
वायु सेना में होने वाले लड़ाकू विमान हादसों और उसकी वजह से पायलटों की जान का नुकसान सबसे ज्यादा इन्हीं विमानों की वजह से हुआ है। मिकोयन गुरेविच (Mikoyan-Gurevich) को ही मिग-21 विमान कहा जाता है।
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मिराज 2000 विमानों के साथ उड़ान भरता मिग 21
- फोटो : IAF
1964 से हो रहे हैं इस्तेमाल
रूस और चीन के बाद भारत मिग-21 (MiG-21) का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर है। 1964 में इस विमान को पहले सुपरसॉनिक फाइटर जेट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था।
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मिग 21
- फोटो : IAF
भारत ने सोवियत रूस से इस विमान को देश में ही असेंबल करने का अधिकार और तकनीक हासिल की थी। तब से लेकर अब तक इस विमान ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध समेत कई अहम मौकों पर अहम भूमिका निभाई है।
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मिग 21
- फोटो : IAF
रूस ने तो 1985 में इस विमान का निर्माण बंद कर दिया, लेकिन भारत इसके अपग्रेडिड वेरिएंट का इस्तेमाल करता आ रहा है। सितंबर, 2018 तक वायु सेना के पास तकरीबन 120 मिग-21 विमान थे। इन्हें 2021-22 तक सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा।
177 करोड़ रुपये है एक प्लेन की कीमत
मिग-21 सोवियत संघ का उत्पाद है। इसे मिकोयन गुरेविच डिजाइन ब्यूरो (Mikoyan-Gurevich Design Bureau) ने 1950 में डिजायन किया था। यह एक इंजन वाला लड़ाकू विमान है और जब इसका निर्माण शुरू हुआ तब इसकी कीमत तकरीबन 20 करोड़ रुपये (29 लाख डॉलर) थी। मौजूदा समय में इसकी कीमत 177 करोड़ रुपये है।