फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गगनयान मिशन के लिए आखिर कैसे चुने गए भारतीय अंतरिक्षयात्री?

Tue, 07 Jan 2020 02:35 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 10
गगनयान मिशन - फोटो : File photo
नए साल की शुरुआत में ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने साल 2020 के अपने लक्ष्यों की घोषणा कर दी है। उन्होंने बताया कि साल 2020 में गगनयान प्रोजेक्ट के साथ चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट पर भी काम हो रहा है। गगनयान अंतरिक्ष में इसरो का पहला मानव मिशन होगा। इसके लिए भारतीय वायु सेना के चार पायलट चुने गए हैं। उनकी ट्रेनिंग जनवरी के तीसरे सप्ताह से रूस में शुरू होगी। 

विज्ञापन

2 of 10
गगनयान - फोटो : Social media
इसरो ने गगनयान की घोषणा भले ही अब की हो लेकिन अंतरिक्ष में मानव मिशन की योजना पर काम साल 2007 से ही शुरू हो गया था। हालांकि तब बजट की कमी के चलते यह प्रयोग आगे नहीं बढ़ सका। उस वक्त इसरो के शक्तिशाली जीएसएलवी रॉकेट इंसानों को ले जाने वाले मॉड्यूल में सक्षम नहीं थे। इसरो के पास ऐसे रॉकेट या क्रायोजेनिक इंजन नहीं थे जो भारी क्रू मॉड्यूल का वजन उठा सकें। तब इस दिशा में प्रयोग शुरू हुए और साल 2014 में जीएसएलवी मार्क 2 रॉकेट बनने के बाद इसका समाधान हुआ। 
 

सोशल मीडिया वालों ने ली कॉमेडियन से मौज, तस्वीरें देखकर नहीं रूकेगी आपकी हंसी

विज्ञापन

3 of 10
इसरो का क्रायोजेनिक इंजन - फोटो : Social media
इसरो के प्रयोग क्रायोजेनिक इंजन बनाने में भी सफल रहे। इसरो ने एक बार फिर जीएसएलवी मार्क 3 के जरिए गगनयान मिशन की तैयारी की है। जीएसएलवी मार्क 3 वो रॉकेट है जो चंद्रयान 2 को लॉन्च करने में इस्तेमाल हुआ। इसरो ने चंद्रयान 2 के साथ मार्क 3 रॉकेट को तीन बार सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इसी की वजह से अंतरिक्ष में मानवमिशन का इसरो का सपना एक बार फिर 2017 में शुरू हुआ। 

4 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
15 अगस्त 2018 को लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत जल्द ही अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने का प्रोग्राम लॉन्च करेगा। इसके लिए 10 अरब करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसरो ने तब बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र स्थापित की। गगनयान का पहला मिशन दो या तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजना था और फिर उन्हें सुरक्षित रूप से वापस लाना था। 
विज्ञापन

5 of 10
इसरो अध्यक्ष के. सिवन - फोटो : PTI
इसरो के चेयरमैन सिवन ने घोषणा की है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर 2021 तक यह प्रयोग पूरा हो जाएगा। 2019 में अंतरिक्ष यात्रियों के चयन के अलावा, अंतरिक्ष यात्री की टीम ने क्रू मॉड्यूल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो उन्हें लेकर अंतरिक्ष में जाएगा और फिर धरती पर वापस लेकर आएगा। परीक्षण के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को किसी भी दुर्घटना से बचाने के लिए रॉकेट से उन्हें अलग करने के लिए अबॉर्ट टेस्ट भी सफलतापूर्वक किया गया गया। 
विज्ञापन

6 of 10
चंद्रयान 2 - फोटो : ISRO
चंद्रयान 2 के लॉन्च के बाद, यह कहा जाना चाहिए कि भारतीयों की रुचि इसरो गतिविधि में बढ़ी है। इसरो के भावी अंतरिक्ष कार्यक्रमों के बारे में भी आम लोगों की उत्सुकता बढ़ रही है। चार अंतरिक्ष यात्रियों के विशेष प्रशिक्षण के लिए चयनित होने की घोषणा के साथ उनके चयन के तरीके के बारे में उत्सुकता बढ़ रही है।
विज्ञापन

7 of 10
गगनयान के लिए अंतरिक्ष यात्री का सूट - फोटो : Social media
वास्तव में, इन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन काफी पहले शुरू हो चुका था। भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) और भारतीय वायु सेना ने अंतरिक्ष यात्रियों के चयन, प्रशिक्षण और गगनयान कार्यक्रम के लिए अन्य आवश्यक पहलुओं के लिए 29 मई 2019 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अनुबंध के मुताबिक, प्रक्रिया 12 से 14 महीने तक चलेगी। इसके बाद सिवन ने घोषणा की कि चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को भारत में बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा और आगे के प्रशिक्षण के लिए विदेशी अंतरिक्ष एजेंसियों से सहायता ली जाएगी। 

8 of 10
भारतीय वायुसेना - फोटो : file photo
जहां तक भारत में अंतरिक्ष लॉन्च का संबंध है तो अंतरिक्ष यात्रियों की चयन प्रक्रिया का काम इंस्टीच्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन कर रही है। इसने 1957 में भारतीय वायु सेना के एक सहयोगी के रूप में काम शुरू किया था। यह पायलटों को प्रशिक्षित करने में भारतीय वायु सेना की मदद कर रहा है। यही कारण है कि अंतरिक्ष यात्रियों के चयन का काम इस एजेंसी को सौंपा गया। 

9 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
अंतरिक्ष में जाने वाले अंतरिक्ष यात्री अच्छे पायलट होने चाहिए। इसके अलावा उनकी पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की भी होनी चाहिए। पहले अंतरिक्ष यात्रियों के चयन के लिए उत्साही लोगों से आवेदन मांगे जाते हैं। इस उद्देश्य के लिए भारतीय वायु सेना के पायलट विभाग में आंतरिक रूप से अधिसूचना जारी की जाएगी। आवेदनकर्ताओं का मूल्यांकन किया जाएगा और योग्य उम्मीदवारों को चयन किया जाएगा। चयनित प्रत्याशियों के अंतरिक्ष यात्रा के लिए उनके शारीरिक योग्यता जांच के लिए कुछ मेडिकल टेस्ट किए जाएंगे। सफल प्रत्याशियों को आगे के परीक्षणों के लिए ले जाया जाएगा। 
विज्ञापन

10 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File photo
दूसरे चरण में चयनित पायलटों का शारीरिक परीक्षण किया जाएगा। जो शारीरिक टेस्ट में चयनित हो जाएंगे उनका चयन बुनियादी अंतरिक्ष परीक्षण के लिए किया जाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन एयर कॉमर्स ने ऐस्ट्रनॉट सलेक्शन एग्रीमेंट पर कहा कि वे 30 भारतीय वायु सेना के पायलटों में से शौक रखने वाले का चयन करेंगे। उनमें से 15 को अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा और आखिर में नौ का चयन किया जाएगा और उन्हें विदेश में पूर्णकालिक अंतरिक्ष यात्री का प्रशिक्षण दिया जाएगा।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें