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62 साल पहले की गई चीन की वो भयानक गलती, जिसकी वजह से मारे गए थे करोड़ों लोग

Sat, 28 Mar 2020 10:34 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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62 साल पहले चीन ने की थी एक भयानक गलती - फोटो : Social media
इतिहास में कई ऐसी भयानक और दर्दनाक घटनाएं घटी हैं, जिनके बारे में जानकर रूह तक कांप जाती है। एक ऐसी ही भयानक घटना आज से 62 साल पहले चीन में घटी थी, जिसमें करोड़ों लोग मारे गए थे और इस भयानक तबाही के पीछे खुद की ही एक गलती थी, जिसे बाद में सुधारने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना को 'ग्रेट चाइनीज फेमिने' के नाम से जाना जाता है। शायद ही ऐसा कोई चीनी नागरिक होगा, जो इस घटना के बारे में न जानता हो। 
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माओ जेडॉन्ग (माओ त्से-तुंग) - फोटो : Social media
1958 की बात है। तब चीन की सत्ता संभाल रहे थे माओ जेडॉन्ग, जिन्हें माओ से-तुंग भी कहा जाता है। उन्होंने एक अभियान शुरू किया था, जिसे 'फोर पेस्ट कैंपेन' के नाम से जाना जाता है। इस अभियान के तहत उन्होंने चार जीवों (मच्छर, मक्खी, चूहा और गौरैया चिड़िया) को मारने का आदेश दिया था। उनका कहना था ये चारों जीव किसानों की मेहनत बेकार कर देते हैं, खेतों में मौजूद उनके सारे अनाज खा जाते हैं। 
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गौरैया (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
अब चूंकि मच्छर, मक्खी और चूहों को मारना थोड़ा मुश्किल काम था, क्योंकि वो आसानी से खुद को कहीं छुपा लेते थे, लेकिन गौरैया चिड़ियों की तो आदत है कि वो हमेशा इंसानों के बीच ही रहना पसंद करती हैं। लिहाजा वो माओ जेडॉन्ग के आदेश का शिकार बन गईं और पूरे चीन में उन्हें ढूंढ-ढूंढकर मारा जाने लगा। यहां तक कि उनके घोंसलों को भी उजार दिया गया, ताकि कोई जिंदा न बच पाए। 

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चीन की एक भयानक गलती - फोटो : Social media
लोग बर्तन, टिन या ड्रम बजा-बजाकर गौरैया को उसकी जगह से उड़ाते और उसे तब तक कहीं बैठने नहीं देते, जब तक कि वह उड़ते-उड़ते थक न जाए और आसमान से ही गिर कर मर न जाए। इतना ही नहीं, जो व्यक्ति जितनी संख्या में गौरैया मारता था, उसे उतना ही बड़ा इनाम भी मिलता था। इस लालच में चीनी लोग वो कर बैठे, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की हो। 
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चीन की एक भयानक गलती - फोटो : Social media
एक घटना है, जब गौरैया का एक झुंड बीजिंग स्थित पोलैंड के दूतावास में जाकर छुप गया, लेकिन चीनी लोग उन्हें मारने के लिए वहां तक भी पहुंच गए। हालांकि दूतावास के अधिकारियों ने लोगों को अंदर नहीं घुसने दिया। लिहाजा लोगों ने एक तरकीब निकाली। उन्होंने दूतावास को चारों तरफ से घेर लिया और ड्रम पीटने लगे। यह सिलसिला लगातार दो दिनों तक चला। आखिरकार गौरैयों का झुंड अधिक शोर की वजह से दूतावास के अंदर ही मर गया, जिसके बाद सफाई कर्मियों ने उन्हें दूतावास से बाहर फेंक दिया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
साल 1960 में माओ जेडॉन्ग ने गौरैया को मारने का अपना इरादा तब बदल दिया, जब चीन के ही एक मशहूर पक्षी विज्ञानी शो-शिन चेंग ने उन्हें बताया कि गौरैया बड़ी संख्या में अनाज के साथ-साथ उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े भी खा जाती हैं। इस बीच चीन में चावल की पैदावार बढ़ने के बजाय लगातार घटती जा रही थी, जिसके बाद माओ ने आदेश दिया कि गौरैया को न मारा जाए बल्कि उनकी जगह पर अनाज खाने कीड़ों (टिड्डों) को मारा जाए। 
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चीन में पड़ा था भयानक अकाल - फोटो : Social media
हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गौरैया के न होने से टिड्डों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई थी, जिसका नतीजा ये हुआ कि सारी फसलें बर्बाद हो गईं। नतीजतन चीन में एक भयानक अकाल पड़ा और देखते ही देखते करोड़ों लोग भूखमरी से मारे गए। चीनी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 15 मिलियन यानी 1.50 करोड़ लोगों की मौत भूखमरी से हुई थी। हालांकि कुछ अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15-45 मिलियन यानी 1.50-4.50 करोड़ लोग भूखमरी की वजह से मारे गए थे। यह चीन के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक थी। 
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