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डायनासोर के युग में रहते थे ये विशालकाय जानवर, वैज्ञानिक भी अब तक नहीं जान पाए पूरा रहस्य

Fri, 12 Jun 2020 10:56 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायनासोर के युग के विशालकाय जानवर - फोटो : Social media
ये तो आप जानते ही होंगे कि आज से करोड़ों साल पहले धरती पर विशालकाय जानवर हुआ करते थे। डायनासोर के बारे में तो लगभग हर इंसान जानता है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जानवर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा स्तनधारी जीव कहा जाता था। ये आज से करीब तीन करोड़ 70 लाख पहले धरती पर घुमा-फिरा करते थे। ये इतने बड़े होते थे कि आज के समय के विशालकाय गैंडे भी उनके सामने बहुत छोटे लगेंगे। चलिए जानते हैं आखिर वो जानवर कौन है और इंसानों को उसके बारे में कैसे पता चला...
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पैरासेराथेरियम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
इस जानवर का नाम है 'पैरासेराथेरियम'। असल में वो गैंडे की ही एक प्रजाति थी, जो विलुप्त हो चुकी है। इनकी चमड़ी भी गैंडे की तरह ही मोटी और बेहद ही सख्त हुआ करती थी, जिसपर बंदूक की गोली का भी कोई असर न पड़े। आपको जानकर हैरानी होगी कि इतना विशालकाय होने के बावजूद ये जानवर शाकाहारी होते थे। इसलिए बाकी के छोटे जानवर उनसे डरते नहीं थे बल्कि आराम से उनके साथ-साथ घुमा करते थे। 
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पैरासेराथेरियम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
पैरासेराथेरियम की ऊंचाई करीब 26 से 40 फीट तक होती थी जबकि इनका वजन करीब 15 से 20 टन हुआ करता था। इस जानवर की सबसे खास बात ये थी कि इनकी गर्दन जिराफ की तरह ही लंबी होती थी। हालांकि वैज्ञानिक अभी तक इनके बारे में पूरी तरह नहीं जान पाए हैं, क्योंकि इस जानवर का पूरा अवशेष अब तक कहीं मिला ही नहीं है। इनकी पूंछ का आकार भी अनुमान के तौर पर ही बताया जाता है।  

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पैरासेराथेरियम के अवशेष - फोटो : Social media
पैरासेराथेरियम का जीवाश्म सबसे पहले 1846 ईस्वी में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में खोजा गया था। इनके अवशेष चीन और रूस समेत कई पश्चिमी देशों में भी मिले हैं। कई देशों के वैज्ञानिक इस विशालकाय जानवर के रहस्यों को उजागर करने के लिए लगातार शोध कर रहे हैं। 
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पैरासेराथेरियम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
इस जानवर के धरती से विलुप्त होने को लेकर ऐसा माना जाता है कि लगभग एक करोड़ 10 साल पहले तक ये एशिया और पश्चिमी यूरोप के क्षेत्रों में जीवित थे, लेकिन बाद में जलवायु परिवर्तन और कम प्रजनन दर की वजह से ये धरती से विलुप्त हो गए। 
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