जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है, चमकने की जरूरत नहीं है, किसी दूसरे की तरह नहीं बल्कि खुद कुछ बनने की जरूरत है । ये शब्द हैं अंग्रेजी साहित्य और कविता को अनोखी उपलब्धि दिलाने वाली महिला वर्जिनिया वुल्फ के। जिनकी जिंदगी काफी तनाव, दर्द और हादसों में बीती लेकिन उनकी कलम कभी नहीं रुकी। हालांकि आखिर में लेखिका ने खुद के साथ वो किया जो काफी दर्दनाक है।