स्पिनालॉन्गा आइलैंड
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असल में 1957 में जब यहां की कुष्ठ रोगी कॉलोनी को बंद किया गया तो यूनान की सरकार चाहती थी कि इसका कोई भी सबूत दुनिया को न मिले। इसीलिए यहां की सारी फाइलें जला दी गईं। यहां के रहने वालों को किसी से बात करने के लिए मना कर दिया गया। इसी वजह से इस जजीरे का राज दुनिया की नजरों से ओझल रहा। यूं लगा जैसे स्पिनालॉन्गा नाम का कोई द्वीप ही इस धरती पर नहीं, पर हालात विक्टोरिया हिस्लॉप के उपन्यास से बदल गए। सैलानी यहां आने लगे। पुराने कुष्ठ रोगियों ने लोगों से बात करनी शुरू की। लोगों को पता लगा कि कोढ़ के मरीजों के लिए यहां अलग से कोई इंतजाम नहीं किया गया था। वेनिस और तुर्की के शासकों ने यहां सैनिकों के रहने के लिए जो इमारतें बनवाई थीं, उन्हीं में मरीज रहा करते थे। द्वीप के चारों तरफ दीवार थी, जिसमें कुष्ठ रोगी कैदियों जैसी जिंदगी बिताते थे। बाद में सरकार की इजाजत से इस दीवार को तोड़ दिया गया ताकि मरीज समुद्र के किनारे आजाद हवा में सांस ले सकें।