सोवियत संघ के शासक जोसेफ स्टालिन को कभी कम्युनिस्टों का आदर्श माना जाता था। वो सोवियत संघ के बहुत बड़े हीरो थे, मगर क्या वो वाकई ऐसे थे? या फिर उन्हें आज नरसंहार करने वाले नेता के तौर पर याद किया जाए? उनकी जिंदगी पर नजर डालें, तो लगता है कि स्टालिन हीरो भी थे और विलेन भी।
विज्ञापन
2 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
स्टालिन के नाम का मतलब होता है लौह पुरुष। स्टालिन ने जिस तरह की जिंदगी जी, उससे ये लगता है कि उन्होंने अपना नाम सार्थक किया। उन्होंने रूस को इतना ताकतवर बनाया कि उसने हिटलर की जर्मन सेना को दूसरे विश्व युद्ध में मात दी। वो करीब एक चौथाई सदी तक सोवियत संघ के सबसे बड़े नेता रहे। लेकिन ये भी कहा जाता है कि स्टालिन के राज में जुल्मो-सितम की भी इंतेहा हुई। उनकी नीतियों और फरमानों की वजह से कथित तौर पर दसियों लाख लोग मारे गए।
विज्ञापन
3 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
एक दौर में दुनिया के सबसे ताकतवर नेता रहे स्टालिन की जिंदगी एक मामूली से परिवार से शुरू हुई थी। स्टालिन की पैदाइश 18 दिसंबर 1879 में जॉर्जिया के गोरी में हुई थी। उनके बचपन का नाम था, जोसेफ विसारियोनोविच जुगाशविली। उस वक्त जॉर्जिया रूस के बादशाह जार के साम्राज्य का हिस्सा था। स्टालिन के पिता पेशे से एक मोची थे। मां कपड़े धोने का काम करती थी। सात बरस की उम्र में स्टालिन को चेचक की बीमारी हो गई, जिससे उनके चेहरे पर दाग पड़ गए। इस बीमारी की वजह से उनके बाएं हाथ में भी खराबी आ गई थी।
4 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
बचपन में स्टालिन बहुत कमजोर थे। दूसरे बच्चे उन्हें बहुत तंग किया करते थे। उनके पिता शराबी थे और अक्सर स्टालिन को पीटा करते थे। जब स्टालिन बड़े हो रहे थे, तो जॉर्जिया में जार के खिलाफ बगावत की चिंगारी सुलग रही थी। वो जॉर्जिया की लोककथाओं और रूस विरोधी विचारों से काफी प्रभावित हुए। स्टालिन की मां धार्मिक ख्यालात वाली थीं। उन्होंने 1895 में स्टालिन को पादरी बनने की पढ़ाई करने के लिए जॉर्जिया की राजधानी तिफ्लिस भेजा, लेकिन स्टालिन को धार्मिक किताबों में जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। वो छुप-छुपकर कार्ल मार्क्स की किताबें पढ़ा करते थे। स्टालिन ने उन दिनों एक समाजवादी विचारधारा वाले संगठन की सदस्यता भी ले ली थी। ये संगठन रूस के बादशाह के खिलाफ लोगों को एकजुट करता था। मां की ख्वाहिश के खिलाफ जाकर स्टालिन ने पादरी बनने से साफ इनकार कर दिया। 1899 में उन्हें धार्मिक स्कूल से बाहर कर दिया गया।
विज्ञापन
5 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
बीसवीं सदी की शुरुआत में स्टालिन ने तिफ्लिस के मौसम विभाग में काम करना शुरू कर दिया था। इस दौरान वो लगातार रूसी साम्राज्य के खिलाफ बागी तेवर अपनाए हुए थे। स्टालिन अक्सर हड़ताल और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया करते थे। जार की खुफिया पुलिस को स्टालिन की हरकतों का अंदाजा हो चुका था। मजबूरन उन्हें भूमिगत होना पड़ा। तब स्टालिन बोल्शेविक पार्टी में शामिल हो गए। 1905 में स्टालिन ने पहली बार रूसी साम्राज्य के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध में हिस्सा लिया। रूस में बोल्शेविक क्रांति के अगुवा व्लादिमीर लेनिन से स्टालिन की पहली मुलाकात फिनलैंड में हुई थी। लेनिन उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। 1907 में स्टालिन ने तिफ्लिस में एक बैंक में डकैती डालकर ढाई लाख रूबल चुरा लिए। ये रकम जार विरोधी आंदोलन में काम आई।
विज्ञापन
6 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
जोसेफ स्टालिन ने 1906 में पहला ब्याह केटेवान स्वानिजे से किया। वो एक छोटे-मोटे सामंती परिवार से ताल्लुक रखती थीं। शादी के एक साल बाद स्टालिन के एक बेटा पैदा हुआ। तिफ्लिस में बैंक डकैती के बाद स्टालिन को जॉर्जिया छोड़कर भागना पड़ा था। वो अजरबैजान के बाकू शहर में जाकर रहने लगे। शादी के एक साल बाद ही 1907 में स्टालिन की पत्नी केटेवान का टाइफाइड से निधन हो गया। इस बात से स्टालिन को जबरदस्त झटका लगा था। स्टालिन ने अपने बेटे को उसके नाना-नानी के पास छोड़कर खुद को पूरी तरह से रूसी क्रांति के हवाले कर दिया। इसी दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर स्टालिन रख लिया।
विज्ञापन
7 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
बागी तेवरों की वजह से स्टालिन को कई बार गिरफ्तार किया गया। 1910 में उन्हें साइबेरिया भेज दिया गया था। 1917 में लेनिन की अगुवाई में रूस में कम्युनिस्ट क्रांति कामयाब हो गई। लेनिन ने लोगों से अमन, जमीन और रोटी का वादा किया। स्टालिन ने इस क्रांति में अहम रोल निभाया था। वो उस दौरान बोल्शेविक पार्टी का अखबार प्रावदा चलाते थे। जब उन्होंने लेनिन को जार की सेना से छुड़ाकर फिनलैंड भागने में मदद की, तो स्टालिन को पार्टी में बड़ा ओहदा दिया गया। जार की हुकूमत खत्म होने के बाद रूस में गृह युद्ध छिड़ गया।
8 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
गृह युद्ध के दौरान स्टालिन ने पार्टी के भगोड़ों और बागियों को सरेआम सूली पर चढ़ाने का आदेश दिया। जब लेनिन सत्ता में आए तो उन्होंने स्टालिन को कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव नियुक्त किया। 1924 में लेनिन की मौत हो गई। इसके बाद स्टालिन ने खुद को उनके वारिस के तौर पर पेश किया। हालांकि पार्टी के बहुत से नेता ये समझते थे कि लेनिन के बाद लियोन ट्राटस्की ही उनके वारिस होंगे, लेकिन ट्रॉटस्की को कई लोग बहुत आदर्शवादी मानते थे। उन्हें लगता था कि ट्रॉटस्की के सिद्धांतों को असल जिंदगी में लागू कर पाना बहुत मुश्किल है। इस दौरान स्टालिन ने अपनी राष्ट्रवादी मार्क्सवादी विचारधारा का जोर-शोर से प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद सोवियत संघ को मजबूत करना है, पूरी दुनिया में इंकलाब लाना नहीं। जब ट्रॉटस्की ने स्टालिन की योजनाओं का विरोध किया, तो स्टालिन ने उन्हें देश निकाला दे दिया। 1920 के दशक के आखिर के आते-आते स्टालिन सोवियत संघ के तानाशाह बन चुके थे।
9 of 17
सोवियत संघ के जमाने की स्टील फैक्ट्री
- फोटो : Social media
बीस के दशक में ही स्टालिन ने पंचवर्षीय योजनाओं के जरिए देश की तरक्की के लिए काम करना शुरू कर दिया। वो सोवियत संघ को आधुनिक देश बनाने में जुट गए। स्टालिन को लगता था कि अगर सोवियत संघ में औद्योगीकरण नहीं हुआ, तो कम्युनिस्ट क्रांति नाकाम हो जाएगी, देश बर्बाद हो जाएगा। पड़ोस के पूंजीवादी देश उस पर कब्जा कर लेंगे। स्टालिन के राज में सोवियत संघ में कोयले, तेल और स्टील का उत्पादन कई गुना बढ़ गया। देश ने तेजी से आर्थिक तरक्की की। स्टालिन ने अपनी योजनाओं को बहुत सख्ती से लागू किया। कारखानों को बड़े-बड़े टारगेट दिए जाते थे। कई बार तो ये टारगेट पूरे कर पाना नामुमकिन सा लगता था। जो लोग लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहते थे, उन्हें देश का दुश्मन कह कर जेल में डाल दिया जाता था।
10 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
जब स्टालिन सत्ता में आए तो रूस में ज्यादातर जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों के मालिकाना हक में बंटी हुई थी। अक्सर अकाल पड़ा करते थे। खेतों में बहुत कम अनाज होता था। स्टालिन ने खेती का आधुनिकीकरण शुरू किया। उन्होंने तमाम जमीन का राष्ट्रीयकरण कर दिया। बहुत से किसानों ने इसका विरोध किया। किसानों ने अपने जानवर मारकर और अनाज छुपाकर इसका विरोध किया। इसकी वजह से करीब पचास लाख लोग भुखमरी से मर गए। इससे नाराज स्टालिन ने जमाखोरी करने वाले और उनकी नीतियों का विरोध करने वाले किसानों को मरवाना शुरू कर दिया। दसियों लाख लोग मारे गए। तीस के दशक का आखिर आते-आते, सोवियत संघ में जमीन का पूरी तरह से राष्ट्रीयकरण हो गया था। अनाज का उत्पादन कई गुना बढ़ गया।
11 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
जोसेफ स्टालिन खुद को एक नरमदिल और देशभक्त नेता के तौर पर प्रचारित करते थे, लेकिन स्टालिन अक्सर उन लोगों को मरवा देते थे, जो भी उनका विरोध करता था। फिर चाहे वो सेना के लोग हों या फिर कम्युनिस्ट पार्टी के। आरोप तो ये भी है कि स्टालिन ने पार्टी की सेंट्रल कमेटी के 139 में से 93 लोगों को मरवा दिया था। इसके अलावा उन्होंने सेना के 103 जनरल और एडमिरल में से 81 को मरवा दिया था। स्टालिन की खुफिया पुलिस बड़ी सख्ती से उनकी नीतियां लागू करती थी। साम्यवाद का विरोध करने वाले तीस लाख लोग साइबेरिया के गुलाग इलाके में रहने के लिए जबरदस्ती भेज दिए गए थे। इसके अलावा करीब साढ़े सात लाख लोगों को मरवा दिया गया था।
12 of 17
जोसेफ स्टालिन
- फोटो : Social media
1919 में जोसेफ स्टालिन ने नदेज्दा एल्लीलुएवा से दूसरी शादी की। इस शादी से स्टालिन को एक बेटी स्वेतलाना और बेटा वैसिली हुआ, लेकिन स्टालिन अपनी दूसरी पत्नी से बहुत बदसलूकी करते थे। उनकी दूसरी पत्नी नदेज्दा ने 1932 में खुदकुशी कर ली। हालांकि आधिकारिक तौर पर बताया गया कि उनकी मौत बीमारी की वजह से हुई। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान स्टालिन की पहली शादी से हुए बेटे याकोव को जर्मन सेना ने गिरफ्तार कर लिया। जब जर्मनी ने बंदियों की अदला-बदली में याकोव को रूस को सौंपने का प्रस्ताव किया, तो स्टालिन ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया। जर्मनी के युद्धबंदी कैंप में ही स्टालिन के बेटे याकोव की 1943 में मौत हो गई थी।
13 of 17
एडोल्फ हिटलर
- फोटो : Social media
जब दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ, तो स्टालिन ने जर्मनी के तानाशाह हिटलर के साथ समझौता करके पूर्वी यूरोप के देशों का आपस में बंटवारा कर लिया। जर्मनी की सेना ने बड़ी आसानी से फ्रांस पर कब्जा कर लिया। ब्रिटेन को भी पीछे हटना पड़ा। इस दौरान रूसी सेना के जनरलों ने स्टालिन को आगाह किया कि जर्मनी, सोवियत संघ पर भी हमला कर सकता है, लेकिन स्टालिन ने अपने फौजी कमांडरों की चेतावनी अनसुनी कर दी। 1941 में जर्मनी ने पोलैंड पर कब्जा कर लिया और सोवियत संघ पर भी जबरदस्त हमला किया। सोवियत सेनाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
14 of 17
हिटलर और उसकी सेना
- फोटो : Social media
हिटलर के धोखे से स्टालिन इस कदर गुस्सा हो गए कि वो कोई फैसला नहीं ले पा रहे थे। स्टालिन ने खुद को एक कमरे में कैद कर लिया। कई दिनों तक सोवियत संघ की सरकार दिशाहीन रही। इस दौरान हिटलर की सेनाएं राजधानी मॉस्को तक आ पहुंचीं। जर्मनी के लगातार हमलों से सोवियत संघ का बुरा हाल था। देश तबाही के कगार पर खड़ा था, लेकिन स्टालिन नाजी सेना पर जीत के लिए अपने देश के लाखों लोगों को कुर्बान करने के लिए तैयार थे। दिसंबर 1941 में जर्मन सेनाएं रूस की राजधानी मॉस्को के बेहद करीब पहुंच गईं। सलाहकारों ने स्टालिन को मॉस्को छोड़ने की सलाह दी, मगर स्टालिन ने इससे साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अपने कमांडरों को फरमान जारी किया कि उन्हें नाजी सेनाओं को किसी भी कीमत पर हराना होगा।
15 of 17
स्टालिनग्राड की लड़ाई
- फोटो : Social media
जर्मनी और रूस के बीच जंग में स्टालिनग्राड की लड़ाई से निर्णायक मोड़ आया। हिटलर ने इस शहर पर इसलिए हमला किया क्योंकि इसका नाम स्टालिन के नाम पर था। वो स्टालिनग्राड को जीतकर स्टालिन को शर्मिंदा करना चाहता था, लेकिन स्टालिन ने अपनी सेनाओं से कहा कि वो एक भी कदम पीछे नहीं हटेंगी। स्टालिनग्राड के युद्ध में रूसी सेना के दस लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए, लेकिन आखिर में सोवियत सेनाओं ने जर्मनी को मात दे दी। इसके बाद तो सोवियत संघ ने हिटलर की सेनाओं को वापस जर्मनी की तरफ लौटने को मजबूर कर दिया। सोवियत सेनाएं, जर्मनी को खदेड़ते हुए राजधानी बर्लिन तक जा पहुंचीं।
16 of 17
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी को हराने में स्टालिन ने बहुत अहम भूमिका निभाई थी। युद्ध के बाद पूर्वी यूरोप के एक बड़े हिस्से पर सोवियत सेनाओं ने कब्जा कर लिया। उन्होंने जर्मनी की राजधानी बर्लिन के पूर्वी हिस्से पर भी कब्जा कर लिया। स्टालिन ने कहा कि ये सभी देश सोवियत संघ के अंगूठे तले रहेंगे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन, स्टालिन के साथ थे, मगर युद्ध के बाद स्टालिन की नीतियों के चलते वो उसके दुश्मन बन गए। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा कि स्टालिन यूरोप के एक बड़े हिस्से को लोहे के पर्दे से बंद कर रहे हैं। बर्लिन को लेकर ब्रिटेन-अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनातनी इस कदर बढ़ गई कि स्टालिन ने पूर्वी बर्लिन में अमेरिकी और ब्रिटिश सेनाओं के घुसने पर रोक लगा दी। अमेरिका ने पूर्वी बर्लिन में फंसे लोगों को 11 महीने तक हवाई रूट से मदद पहुंचाई। शीत युद्ध का आगाज हो चुका था। सोवियत संघ ने 29 अगस्त 1949 को अपने पहले एटम बम का परीक्षण किया।
अपने आखिरी दिनों में स्टालिन बहुत शक्की हो गए थे। वो पार्टी में कई लोगों को अपना दुश्मन मानने लगे थे। ऐसे हर शख्स को वो मरवा दिया करते थे। पांच मार्च 1953 को दिल का दौरा पड़ने से स्टालिन का निधन हो गया। सोवियत संघ में बहुत से लोगों ने उनकी मौत पर मातम मनाया। उन्हें महान नेता बताया, जिसने देश को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया था, जिसने हिटलर को हराने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन सोवियत संघ में ही लाखों लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने स्टालिन की मौत का जश्न भी मनाया। स्टालिन के बाद सोवियत संघ के नेता बने निकिता ख्रुश्चेव ने स्टालिन की नीतियों से किनारा कर लिया। कुल मिलाकर स्टालिन की जिंदगी एक ऐसे शख्स की रही, जिसने शुरुआत तो इंकलाब से की थी। मगर बाद में वो सनकी तानाशाह बन गए। यानी वो हीरो भी थे और विलेन भी।