रिसर्चर वैज्ञानिक डॉ. रोसालिया नेवे ने एविडेंस नेटवर्क में लिखे एक लेख में बताया है कि पूर्वी अफ्रीका में महाद्वीप के टूटने के निशान नजर आने लगे हैं। उन्होंने इस विभाजन को 'ग्रेट रिफ्ट वैली' बताया है। यह वैली उत्तर से दक्षिण तक लगभग 6,000 किलोमीटर तक फैली है। इस इलाके में धरती की सतह धीरे-धीरे फट रही है और नीचे से उठती हुई गर्म मैग्मा परतों के कारण यह प्रक्रिया को और तेज हो रही है। इस भूगर्भीय कहानी के किलिमंजारो जैसे विशाल ज्वालामुखी पर्वत सबूत हैं। यह करीब 2.5 करोड़ वर्षों से जारी महाद्वीपीय परिवर्तन का प्रतीक हैं।
इस लेख में बताया गया है कि पूर्वी अफ्रीका का यह क्षेत्र तीन प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों, 1- सोमालियन प्लेट, 2- अफ्रीकन प्लेट और 3- अरेबियन प्लेट के संगम पर मौजूद है। इन भू-स्थितियों से महाद्वीपीय रिफ्टिंग के लिए शानदार परिस्थितियां बनती हैं।
Interesting Facts: क्यों विशेष लोगों के स्वागत में रेड कार्पेट ही बिछाया जाता है? जानकर हो जाएंगे हैरान
वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमालियन प्लेट हर वर्ष कुछ मिलीमीटर की गति से पूर्व दिशा की तरफ खिसकती जा रही है। इससे धरती की परत धीरे-धीरे खिंचती जा रही है। सैटेलाइट और जीपीएस तकनीक से इसकी निगरानी की जा रही है। इसमें में यह साबित हुआ है कि यह प्रक्रिया फिलहाल धीमी गति से चल रही है, लेकिन ये लगातार हो रही है।
Viral Video: शख्स ने ट्रैफिक चालान से बचने के लिए हेलमेट की जगह पहनी कढ़ाही, नजारा देख लोगों की छूटी हंसी
इस विभाजन से धरती की सतह खींचकर पतली होती जा रही है और एक दिन इसके टूटने की रफ्तार काफी अधिक बढ़ जाएगी। वैज्ञानिकों ने आकलन किया है कि फिलहाल इस प्रक्रिया में कई सौ साल लगेंगे, लेकिन जब यह प्रक्रिया तेज होगी, तो फिर कुछ सेकंड्स या मिनट का समय लगेगा।
Flying Snakes: इन देशों में मिलते हैं उड़ने वाले सांप, ऊपर से गुजरने पर घट जाती है लंबाई? जानिए क्या है सच
वैज्ञानिकों के मुताबिक, परत के पूरी तरह टूटने पर समुद्र का पानी इस दरार में भर जाएगा, जिससे एक नए महासागर का निर्माण होगा। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह नया सागर अफार क्षेत्र से लेकर केन्या और तंजानिया की सीमा तक फैल जाएगा। इससे हॉर्न ऑफ अफ्रीका एक विशाल द्वीप में बदल जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि जब यह प्रक्रिया तेज होगी तो सिर्फ कुछ समय लगेगा।