बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में रविवार की सुबह से आग ने विकराल रूप धारण किया हुआ है। बता दें कि शनिवार शाम से ही VTR में आग लगी है। घटनास्थल पर वन विभाग की टीम पहुंची हुई है। वन विभाग की टीम फायर लाइन बनाकर आग बुझाने की कोशिश कर रही है। हालांकि अभी तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है।
जानकारी के मुताबिक, आग की लपटें इतनी तेज हैं कि VTR जंगल के कई इलाकों में फैल कर पूरी हरियाली नष्ट कर रही हैं। आग किन कारणों से लगी है, इसकी पुष्टि नहीं की गई है। जंगल की झाड़ियों में आग की धधक है। इसके कारण वन्य प्राणियों में अफरातफरी का माहौल है। संसाधनों के अभाव के कारण वन विभाग के कर्मचारी कहीं झाड़ियों के सहारे तो कहीं फायर लाइन बनाकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।
VTR के मदनपुर वन क्षेत्र में लगी आग
VTR के मदनपुर वन क्षेत्र के इलाके में लगी आग ने अब तक दर्जनों एकड़ जंगल को अपने आगोश में ले लिया है। बताया जा रहा कि जंगल में चरवाहों या असामाजिक तत्वों द्वारा इस मौसम में अक्सर आग लगाने की घटना को अंजाम दिया जाता है। इसके चलते पूरे जंगल में आग लग जाती है।
हर साल 40 से 45 बार लगती है आग
बताया जाता है कि VTR में बीते पांच सालों में आग की 250 से अधिक घटनाएं घटी हैं। हार साल औसतन 200 से 300 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आ रहा है। इस आगजनी की घटना में छोटे पौधे, जड़ी बूटियां और पारिस्थितिकी तंत्र में अहम योगदान देने वाले असंख्य कीट-पंतगों और सांप आदि छोटे जीव-जंतुओं को भारी नुकसान पहुंचता है।
वन संरक्षण डॉक्टर नेशा मानी के ने बताया कि नेचुरल तरीके से आग लगने की घटनाएं काफी कम होती हैं। ज्यादातर घटनाएं लोगों द्वारा खेतों में पराली जलाने के कारण होती हैं। इसके साथ ही घास काटने वाले और पशु चराने वाले भी आग लगाते हैं।