बिहार चुनावों पर बीबीसी की विशेष सिरीज़ 'बूझिए ना बिहार को' में हम आपको अगले कुछ दिनों तक राज्य से जुड़े मिथकों और तथ्यों के बारे में बताते रहेंगे। इस कड़ी में जानिए, क्या है 'वोट कटवा' पार्टी और इस बार चुनाव मैदान में कौन कौन वोट कटवा पार्टी हैं?
बिहार चुनाव में बड़े पैमाने पर राजनीतिक पार्टियां हिस्सा लेती हैं। लेकिन इनमें से ज़्यादातर पार्टिया सिर्फ़ राज्य में अपना आधार बढ़ाने के लिए उम्मीदवार उतारती हैं।
समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा इत्यादि ऐसे ही दल हैं, ये अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारते हैं और उन्हें कुछ वोट भी मिल जाते हैं।
साल 2010 का चुनाव इस मायने में अलग था। दो गठबंधन के चुनाव मैदान में होने के अलावा कई पार्टियां स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में थीं, इन पार्टियों ने बड़ी संख्या में अपने उम्मीदवार उतारे थे।
कौन है 'वोट कटवा' पार्टी?
पर बिहार विधानसभा के मौजूदा चुनाव में इनमें से ज़्यादातर को सिर्फ़ दूसरे दलों के वोट काटने वाली पार्टी के तौर पर देखा जाएगा। इस बार कौन-कौन 'वोट कटवा' पार्टी चुनाव मैदान में हैं?
पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी और मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को मुश्किल से कोई सीट मिले, लेकिन दोनों राजद के यादव वोट बैंक में सेंध जरूर लगाएंगी। असदउद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-एत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) भी मैदान में है।
पासवान-मांझी के वोटों में सेंध?
ओवैसी की पार्टी ने बिहार के सीमांचल में उन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारने का फ़ैसला किया है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी ख़ासी संख्या है।
यह पार्टी कोई सीट जीत पाएगी, इसमें संदेह ही है, लेकिन यह लालू-नीतीश के मुस्लिम वोट बैंक को कुछ हद तक प्रभावित कर सकती है। बहुजन समाज पार्टी भी अपने उम्मीदवार के ज़रिए बीजेपी के सहयोगी पासवान और मांझी की पार्टी के वोटों में सेंध लगाएगी।