एक तरफ बिहार के कई जिलों पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर आपदा प्रबंधन के लोगों के सामने चुनौती है कि वे लोगों को उनके गांवों से दूर भेज पाएं।
बिहार में बाढ़ की स्थिति कैसी होगी यह इस समय इस बात पर निर्भर है कि नेपाल में कोसी नदी का बहाव कैसा होगा। इसी के चलते आपदा प्रबंधन पूरी तैयारी में जुटी है लेकिन उनके सामने लोगों को उनके घरों से दूर भेजने की चुनौती जस की तस बनी हुई है।
आपदा प्रबंधन के कमांडेंट विजय सिन्हा का कहना है कि बिहार में भाटियाही के 25-30 गांव बिल्कुल कोसी नदी की गोद में बसे हैं। ऐसे में लोगों को यह समझाने में बड़ी मुश्किल आ रही है कि वे अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंच जांए। लोग अपना घर, अपनी जगह छोड़कर जाने के लिए तैयार ही नहीं हो रहे हैं।
पूंछ पकड़कर पार हो जाएगी बाढ़
कमांडेंट का कहना है कि लोगों ने अपने बच्चों और परिवार के बाकी लोगों को तो सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है लेकिन वे खुद कहीं जाने के लिए तैयार नहीं है। वे बाढ़ के इस भयावह खतरे के बीच भी अपने घर में अपने मवेशियों के साथ ही रुके हुए हैं।
यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि हम भैंस की पूंछ पकड़कर बाढ़ पार कर जाएंगे। लोगों का कहना है कि हम ऐसा बहुत बार कर चुके हैं। लोग उन्हें बता रहे हैं कि बाढ़ प्रकृति का हिस्सा है। इस जगह हमेशा बाढ़ आती है और हम नदियां भी इसी तरह पार कर जाते हैँ।
कमांडेंट का कहना है कि परिवारों में ज्यादातर पुरुष अपनी जमीन और मवेशियों को छोड़ने के लिए राजी नहीं है।
मानने को नहीं तैयार
प्रबंधन टीम की बहुत सी कोशिशों के बावजूद सैकड़ों लोग हैं जो अपनी जमीन पर बने हुए हैं।
ऐसे में जितने लोग खतरे के इलाकों में हैं उन्हें बचाने के लिए आपदा प्रबंधन की टीम ने खास तरह की नावों को तैय्यार किया हुआ है। ताकि आपदा की स्थिति में लोगों को बचाया जा सके।
कमांडेंट का कहना है कि हम यहां लोगों को बचाने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। हमने अपने साथ मैथिली बोलने वाले लोगों को रखा हुआ है ताकि वे स्थानीय लोगों से बात कर सके। और उन्हें फिलहाल की स्थिति और आने वाले खतरे के बारे में बता सकें।
कमांडेंट हैरत जताते हुए अपने अनुभव साझा करते रहे। वे बोले कि खुद मैंने भी एक बेहद बुजुर्ग व्यक्ति को खतरे के बारे में बताया और समझाने की कोशिश की कि वे सुरक्षित जगह पर चले जाएं। लेकिन वे मानने को राजी ही नहीं हुए और बोले कि मैं भैंस की पूंछ पकड़कर बाढ़ पार कर लूंगा।