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दलितों के लिए नीति बयान पर उदय नारायण का यू-टर्न!

Thu, 02 Nov 2017 09:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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उदय नारायण चौधरी - फोटो : ANI
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जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी ने गुरूवार को 'दलितों' के लिए नीति पर दिए अपने पहले के बयान से यू-टर्न मार दिया। उन्होंने कहा कि हाशिये पर जी रहे लोगों की अनदेखी बिहारी के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं बल्कि केंद्र सरकार कर रही है। 
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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चौधरी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार सरकार के पास दलितों के उत्थान के लिए ना तो कोई नीति है और ना ही कोई मंशा।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए चौधरी ने सफाई दी कि नीतीश कुमार कभी भी सवालों के दायरे में नहीं थे क्योंकि कोटा बढ़ाने या घटने के लिए वे ज़िम्मेदार नहीं हैं। 

चौधरी ने एएनआई से कहा, "सवाल कभी भी नीतीश कुमार के बारे में नहीं था। वे हमारे नेता हैं और नेता रहेंगे। मैं संविधान के दायरे में बात करूंगा। नीतीश क्या करेंगे? पदोन्नति में दिए जाने वाले आरक्षण को रद्द किए जाने पर नीतीश क्या कर सकते हैं? इस बारे में केंद्र सरकार को कोई बिल पास करना चाहिए था।" 
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"पदोन्नति में आरक्षण रद्द करना बहुत बड़ा धक्का"

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जदयू नेता चौधरी ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण रद्द करना दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़ा तबकों के लिए बहुत बड़ा धक्का है। 

उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार गरीबों के उत्थान, पिछड़े वर्गों के अधिकारों, कुपोषण जैसे बड़े मुद्दों से भटक गई है और गौ रक्षा और राम मंदिर में व्यस्त है।" 

चौधरी से ये पूछा गया कि जब नीतीश सरकार में थे तब उन्होंने ये मुद्दा कभी नहीं उठाया। इस पर उन्होंने कहा कि वे एक संवैधानिक पद थे और तब ऐसी बातें नहीं कह सकते थे। 

उन्होंने कहा, "छात्रवृत्ति का प्रावधान हाल में हटाया गया है तो ये मुद्दा मैं पहले क्यों उठाता।" 

रिपोर्ट के मुताबिक चौधरी ने कहा था कि नीतीश कुमार का "ध्यान अब दलित उत्थान पर केंद्रित नहीं है", और चेताया था कि बीजेपी उनके साथ "खराब व्यवहार" जारी रखेगी।

इससे पहले सोमवार को चौधरी और जदयू महासचिव श्याम रजक ने राज्य में आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग का विरोध किया था। 

उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार पदोन्नति में आरक्षण को ख़त्म और साथ ही अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए क्रीमी लेयर को शामिल करना चाहती है।
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