मोतिहारी में उजाले के बीच अंधेरा है। यहां कहने को तो पिछले वर्ष से सोलर लाइट लगाया जा रहा है पर आज तक महज 20% सोलर लाइट भी नहीं लग सका है। आज भी ग्रामीण उजाले की बाट जोह रहे हैं। गांव की महिलाएं शिकायत भरी लहजे में कहती है कि मुखिया जी जब जीते थे तो गांव में सोलर लाइट लगाने का वादा किए थे पर गांव में कहीं पर भी सोलर लाइट नहीं लग सका है। अमर उजाला की टीम ने मुखिया जी से सवाल पूछा तो मुखिया जी ने भी अपना हाथ खड़ा करते हुए बताया कि अभी तक सोलर लाइट लगाने वाली कोई एजेंसी उनके पास नहीं आई है।
यह तस्वीर मोतिहारी के कोई एक गांव की नहीं है, जब हमने दूसरे पंचायत का रुख किया तो बसमानपुर पंचायत में सोलर लाइट तो दिखाई दी पर कुछ दिन और रात में जलता दिखा। ज्यादातर लाइट खराब होने के कारण रात में बंद दिखी। मोतिहारी के 396 पंचायतों के प्रत्येक वार्ड में दस-दस सोलर लाइट लगाना है। वर्ष 23-25 तक मोतिहारी के ग्रामीण इलाकों में कुल 43,560 सोलर लाइट लगाना है। जिसके एवज में अभी तक मोतिहारी में कुल 6,312 सोलर लाइट ही लग सकी है। यानी लक्ष्य से 20% से भी कम। फिर लाइट लगाने वाले एजेंसी को पांच वर्षों तक सोलर लाइट का मेंटेनेंस भी करना है। नियम तो यह भी है कि अगर कहीं का सोलर लाइट खराब होता है तो तीन दिनों के अंदर उसे ठीक करना है, नहीं तो सोलर लाइट लगाने वाले एजेंसी से दस रुपए प्रति दिन के हिसाब से फाइन लगया जाना है।