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बिहार: तेजस्वी ने बिहार-बंगाल में फिर चुनाव करवाने की मांग क्यों की, चुनाव आयोग मोदी सरकार पर क्या आरोप लगाया?

Wed, 23 Sep 2026 06:50 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर से मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं तेजस्वी यादव ने फिर से बिहार और बंगाल में चुनाव कराने की मांग कर दी। आइये जानते हैं उन्होंने क्या-क्या कहा?
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तेजस्वी यादव ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय जनता दल और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेकर उनका इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी की। तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में सामने आई रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक, आयोग के भीतर भी कुछ मुद्दों पर असहमति सामने आई है। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान के कामकाज को लेकर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है।

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एसआईआर से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में हुई एसआईआर प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने शुरुआत से ही इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि राजद ने इस मुद्दे को लेकर पहले राजनीतिक स्तर पर आवाज उठाई और बाद में न्यायालय का रुख भी किया। तेजस्वी का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली से विपक्ष को निष्पक्ष चुनाव की चिंता है।

'मोदी-शाह जो चाहते हैं, वही आयोग कहता है'
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र तरीके से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से जारी होने वाले बयानों में सरकार की सोच दिखाई देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर चुनाव आयोग को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए भी गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, ये सभी आरोप तेजस्वी यादव और राजद की ओर से लगाए गए हैं।
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चुनाव रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अवधि पर भी सवाल
तेजस्वी ने चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की अवधि में बदलाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पहले चुनावी रिकॉर्ड को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता था, लेकिन अब अवधि घटाकर 45 दिन किए जाने से चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए विपक्ष के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं रहेंगे तो अदालत में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने की स्थिति में संबंधित पक्ष अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य कैसे पेश करेगा।
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सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया का भी जिक्र
तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पहले नियुक्ति व्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था से सरकार को नियुक्तियों में ज्यादा प्रभाव मिल गया है।

'सिर्फ एक चुनाव आयुक्त को हटाने से बात नहीं बनेगी'
तेजस्वी यादव ने कहा कि समस्या किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी जांच एजेंसियों का भी राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। उनके मुताबिक, सिर्फ चुनाव आयुक्त को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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बिहार और बंगाल में फिर चुनाव की मांग
तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण विपक्ष को नुकसान हुआ। इसी आधार पर उन्होंने दोनों राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजद की मांग है कि बिहार और बंगाल में फिर से चुनाव कराया जाए। तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के पक्ष में चुनावी परिणाम प्रभावित करने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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