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सुधाकर सिंह ने कारण बताया नहीं, पूछा: मैंने राजद का नियम नहीं तोड़ा, पार्टी ने मेरा साथ क्यों छोड़ा

Fri, 03 Feb 2023 10:29 AM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कारण बताओ नोटिस के जवाब में कारण बताने से ज्यादा अपने ही सवाल पूछ डाले हैं। उन्होंने लिखा है कि जब मैंने पार्टी लाइन पर रहते हुए राजद की प्राथमिकताओं के आधार जनता से जुड़े सवाल उठा रहा था तो मेरा साथ छोड़ दिया गया। 
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बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह - फोटो : ट्विटर / सुधाकर सिंह
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विस्तार
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पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में कारण बताने से ज्यादा अपने ही सवाल पूछ डाले हैं। उन्होंने नोटिस के जवाब में सीधा-सीधा लिखा है कि मैंने राजद का कोई नियम नहीं तोड़ा और न ही पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में किसी दूसरी पार्टी या उसके नेता पर बोलने से रोक का कोई प्रस्ताव पारित हुआ था। ऐसे में जब मैंने पार्टी लाइन पर रहते हुए राजद की प्राथमिकताओं के आधार जनता से जुड़े सवाल उठा रहा था तो मेरा साथ छोड़ दिया गया। साथ ही नहीं छोड़ा गया, बल्कि पार्टी मेरे खिलाफ भी खड़ी हो गई। ऐसा क्यों? बयान देने वाले दूसरे नेताओं को कुछ नहीं किया गया।

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जवाब पर राजद की चुप्पी का कारण इसी में 
17 जनवरी को राजद विधायक और पूर्व कृृषि मंत्री सुधाकर सिंह को शोकॉज जारी करते ही बाकी नेताओं को सीख मिल गई कि उन्हें सरकार के खिलाफ या जदयू के खिलाफ नहीं बोलना है, लेकिन सुधाकर सिंह पूरी तरह शांत नहीं हुए। उन्होंने शोकॉज पर बात नहीं की, लेकिन बाकी बातें करते रहे। शोकॉज नोटिस के एक हफ्ते के अंदर भी उन्होंने सरकार के बारे में बहुत कुछ कह डाला। 30 जनवरी को सुधाकर सिंह ने जवाब भेजा, उस दिन से राजद के नेता इसपर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं। राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी भी नहीं। लेकिन, अब जवाब की वह प्रति बता रही है कि सारे चुप क्यों रहे। दरअसल, इस जवाब में ढेर सारे सवाल हैं।

सिद्दीकी से ही पूछ डाले हैं सुधाकर ने सवाल
राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सवाल किया था कि आपत्तिजनक बयानों से गठबंधन धर्म की मर्यादा के उल्लंघन पर क्यों नहीं आपके विरूद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए? इसमें राजद के राष्ट्रीय अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित होने का जिक्र था, जिसके तहत गठबंधन के मसलों और इसमें शामिल दलों के संदर्भ में सिर्फ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एवं उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बात रखने के लिए अधिकृत हैं। शोकॉज के जवाब में सुधाकर सिंह ने लिखा है- “राजद के राष्ट्रीय अधिवेशन में स्वाभाविक तौर पर किसी अन्य राजनीतिक दल या उसके सदस्य से संबंधित न तो कोई चर्चा हुई थी और न कोई प्रस्ताव पारित हुआ था। मेरे किस बयान से राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव का उल्लंघन हुआ है? किस बयान से निष्कर्ष के रूप में मुझे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है? अधिवेशन में दूसरे दल के नेता पर टिप्पणी से रोकने का कोई प्रस्ताव पारित किया गया था क्या?" सुधाकर सिंह ने लिखा है कि वह राजद के प्रति निष्ठावान हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय अधिवेशन में दूसरे दल के नेता के खिलाफ बयान नहीं देने के किसी प्रस्ताव की बात को निराधार भी बता दिया है। उन्होंने लिखा है कि मैं अधिवेशन में मौजूद था और संतुष्टि के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग भी देख लिया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव ही आया था। 
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सवाल में नीतीश का नाम नहीं, जवाब उन्हीं के आसपास
शोकॉज नोटिस में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम या पदनाम का जिक्र नहीं है, लेकिन सुधाकर सिंह की ओर से पांच पन्नों में दिया जवाब मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द ही घूमता नजर आ रहा है। राजद विधायक ने साफ लिखा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दल यूनाईटेड के नेता हैं और दूसरे दल के नेता पर टिप्पणी से रोक नहीं है। उन्होंने नीतीश कुमार के पुराने बयानों को भी रेखांकित किया और लिखा- "यह वही हैं जो कहते रहते हैं कि 2005 के पहले लालू-राबड़ी के राज में बिहार में कोई विकास कार्य नहीं हुआ। यह वही हैं जो राजद की विचारधारा से अलग कृषि का रोडमैप बनाकर मनमाने तरीके से चलाते हैं। यह वही हैं जो राजद के विधायकों को विधानसभा में पिटवाते हैं।" सुधाकर ने सीधा सवाल किया कि राजद की मूल विचारधारा पर चलने के बावजूद पार्टी मेरे साथ नहीं, बल्कि मेरे खिलाफ खड़ी हुई। इसके अलावा पार्टी ने बयान को लेकर शोकॉज जारी करते समय भी जाति के कारण लक्ष्य किया।

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