इस संबंध में जानकारी देते हुए तोपखाना बाजार निवासी चाय दुकानदार सत्यनारायण यादव ने बताया कि वर्ष 2009 में वह अपने छोटे पुत्र जोकि उस वक्त लगभग 13 वर्ष का था, उस वक्त उन्होंने किसी बात को लेकर उसकी पिटाई कर दी, जिसके बाद उनका पुत्र गुस्से में आकर घर छोड़कर भाग गया।
उन्होंने कहा की 14 वर्ष बाद अचानक घर आया, लेकिन घर भूल गया था और मेरी भतीजी सुनैना को पहचान गया और चचेरी बहन से पूछा कि हमको पहचानती हो, जिसके बाद बहन ने उसे पहचाने से इंकार कर गया। जिसके बाद धीरज ने बहन को अपना परिचय दिया। वहीं पिता ने बताया कि जब वह गायब हुआ तो उसकी खोजबीन करने के लिए दिल्ली तक गए थे, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।
2009 में घर से भाग गया था
इस संबंध में घर आने के बाद धीरज ने बताया कि वह पिता के मारपीट से नाराज होकर वर्ष 2009 में घर से भाग गया था और दिल्ली चला गया। वहां तीन दिनों तक उसने प्लेटफार्म पर रहकर समय गुजारा। जिसके बाद वह फिर ट्रेन पकड़कर मेरठ चला गया। मेरठ जाकर 10 दिनों तक मजदूरी करना शुरू की। उसके बाद वह एक ठेकेदार के संपर्क में आया और चीनी मिल में काम करने लगे और वहीं रहने लगा।
बीमारी में दोस्त ने किया इलाज
करीब डेढ़ साल बाद वह पंजाब चला गया और वहां मजदूरी करने लगा। दो साल बाद फिर हरियाणा चला गया और वहां एक वर्ष तक काम करने के बाद उसे बिहार के दो साथी मिल गए, जिसके बाद वह शिमला चला गया। वहां कुछ दिनों तक काम करने के बाद उसे पीलिया हो गया और वह छह माह तक बिमार रहा। शिमला में जिस आदमी ने धीरज को बिमारी के दौरान इलाज करवाया उसी की सलाह पर वो वापस घर आ गया।