बिहार की फिजाओं में राजनीति है। यहां चाय और पकौड़ों की दुकानों पर भी राजनीतिक बहसें होती हैं। पटना में चल रही बहसों में सबसे अधिक जगह बना रही है गठबंधनों की मौजूदा स्थिति। नीतीश कुमार नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन है।
भले ही लालू यादव पड़ोसी राज्य की जेल में बंद हैं। लेकिन महागठबंधन का नेतृत्व लालू प्रसाद यादव ही करते दिख रहे हैं। दोनों गठबंधनों में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारा का मुद्दा उलझ गया है। राजग में शामिल लोजपा ने गठबंधन को असमंजस में डाल दिया है।
लोजपा ने कहा है कि वो अपने ही गठबंधन के साथी जदयू के उम्मीदवारों के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी। लोजपा के इस बयान के बाद जदयू ने तो प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन हील ही में राजग में शामिल हुए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने जदयू के पक्ष में लोजपा को घेर लिया। हम ने कहा, वो लोजपा उम्मीदवारों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारेगा।
बिहार की चर्चाओं में ये बात प्रमुखता से शामिल है कि अमित शाह अगर स्वस्थ रहते तो राजग में सीट शेयरिंग कोई मुद्दा होता ही नहीं। 243 सीटों वाली बिहार विधान सभा के लिए भाजपा जदयू के बीच ही अभी सीट बंटवारे का कोई आखिरी फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है।
गठबंधन में शामिल लोजपा कभी नरम तो कभी कभी गरम रूख दिखाकर गठबंधन को असमंजस में डाले हुए है। भाजपा भी अब लोजपा को बहुत भाव देने के पक्ष में नहीं हैं। भाजपा ने साफ कर दिया है वो गठबंधन में लोजपा को 25 सीट से ज्यादा सीटें नहीं दे सकती है।
सुरजोवाला बोले- महागठबंधन एकजुट
इन सब के बीच पटना पहुंचे कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, महागठबंधन बिहार में पूरी तरह से एकजुट है। सुरजेवाला जब मीडिया से महागठबंधन के एकजुट होने का दावा कर रहे थे, ठीक उसी समय महागठबंधन में शामिल रालोसपा की एक अहम बैठक चल रही थी।
इसमें पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन में उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा है और उनकी पार्टी को सम्मानजनक सीटें नहीं मिल रहीं है। उपेंद्र कुशवाहा के इस बयान ने साफ कर दिया कि वो कांग्रेस और राजद से नाराज हैं औ राजग में उनका शामिल होना तय है।