कर्मचारियों की लापरवाही पर गिरी गाज
घटना की जांच के लिए जिला पदाधिकारी द्वारा गठित संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ड्यूटी पर तैनात प्रभारी केयरटेकर सुनीता देवी और प्रभारी पीओ कुमारी शिवानी जायसवाल को लापरवाही व अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट के आधार पर दोनों संविदा कर्मियों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। साथ ही ड्यूटी पर मौजूद होमगार्ड सिपाही को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने इस संबंध में संबंधित आदेश भी जारी कर दिए हैं।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न
घटना के बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि कैसे बालिका गृह की लगभग 20 फीट ऊंची दीवार और कंटीले तारों की मौजूदगी के बावजूद 13 बालिकाएं रात के अंधेरे में फरार हो गईं? क्या यह सिर्फ भागने की घटना है या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट, उत्पीड़न अथवा साजिश की बू छिपी है? प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर यह घटना गहरे सवाल खड़े करती है।
भाकपा (माले) ने प्रदर्शन कर उठाए सवाल
इस घटना को लेकर भाकपा (माले) ने तीखा विरोध जताया है। पार्टी के जिला सचिव हंसनाथ राम, विधायक अमरजीत कुशवाहा, पूर्व विधायक अमरनाथ यादव सहित पांच सदस्यीय जांच दल बालिका गृह पहुंचा, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें प्रवेश से रोक दिया। इसके विरोध में नेताओं ने बालिका गृह गेट पर देर रात तक धरना दिया। विधायक तक को प्रवेश न देने की घटना से विपक्ष में आक्रोश और बढ़ गया है।
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न्यायिक जांच की उठी मांग
भाकपा (माले) ने इस घटना को केवल बालिकाओं के भागने की सामान्य घटना न मानते हुए आशंका जताई है कि इसके पीछे किसी प्रकार का उत्पीड़न, यौन शोषण या प्रशासनिक मिलीभगत हो सकती है। पार्टी ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
घटना के विरोध में भाकपा (माले) के नेतृत्व में एक प्रतिवाद मार्च भी निकाला गया। यह मार्च ललित बस स्टैंड से शुरू होकर बाबुनिया मोड़ होते हुए जेपी चौक पर एक जनसभा में तब्दील हो गया। जनसभा में 13 बालिकाओं की तत्काल बरामदगी, दोषियों की गिरफ्तारी और प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई।
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जनसभा में जुटी भारी भीड़
इस मार्च और जनसभा का नेतृत्व हंसनाथ राम, अमरजीत कुशवाहा, अमरनाथ यादव, सुरेंद्र प्रसाद, जयनाथ यादव, विकास यादव और मंजीता कौर सहित कई प्रमुख नेताओं ने किया। जनसभा में पूर्व जिला परिषद सदस्य सुजीत कुशवाहा, योगिंद्र यादव, प्रिंस पासवान, महफूज आलम, सुनील पासवान, विशाल यादव, मनोज बैठा और कुंती यादव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए।
प्रशासन के लिए चुनौती बनी बालिकाओं की बरामदगी
जिला प्रशासन अब बालिकाओं की बरामदगी को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रख रहा है। पुलिस और विशेष टीमें सक्रिय हैं और संभावित ठिकानों पर छापामारी जारी है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही सभी बालिकाएं सकुशल बरामद कर ली जाएंगी।