बिहार की राजनीति में एक लंबे समय से अपनी सांगठनिक कुशलता और प्रखर वक्तृत्व शैली के लिए पहचाने जाने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मिथिलेश तिवारी अब सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। बैकुंठपुर से दूसरी बार विधायक चुने गए मिथिलेश तिवारी पहली बार बिहार मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं।
एक जमीनी कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर
मिथिलेश तिवारी का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 29 दिसंबर, 1971 को गोपालगंज के डुमरिया गांव में जन्मे मिथिलेश ने अपनी प्रारंभिक राजनीति की शुरुआत भाजपा के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में की थी। तिवारी ने अपनी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनाई जो संगठन के लिए कहीं भी, कभी भी डटने को तैयार रहता है।
पहली चुनाव में ही मिली हार
उनका चुनावी सफर चुनौतियों भरा रहा है।उन्होंने अपना पहला चुनाव 2005 में भाजपा के टिकट पर कटेया विधानसभा से लड़ा था, लेकिन उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और अधिक सक्रिय कर दिया। करीब एक दशक के कड़े परिश्रम के बाद, 2015 में वे पहली बार बैकुंठपुर से विधायक निर्वाचित हुए। 2020 में मामूली अंतर से मिली हार और 2024 में बक्सर से लोकसभा चुनाव लड़ने के अनुभव के बाद, 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बैकुंठपुर से शानदार जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता साबित कर दी।
संगठन के संकटमोचक और प्रखर वक्ता
मिथिलेश तिवारी को भाजपा के भीतर एक कुशल रणनीतिकार माना जाता है। उन्होंने न केवल बिहार में प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी सक्रिय रहे। दिल्ली भाजपा के प्रभारी के रूप में उनके कार्य ने उन्हें केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में भी विश्वसनीय बनाया है। टीवी बहसों में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखना हो या फिर चुनावी रैलियों में भीड़ को संबोधित करना, तिवारी अपनी वाक्पटुता के लिए जाने जाते हैं। उनकी इसी छवि ने उन्हें ब्राह्मण चेहरे के रूप में बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली स्थान दिलाया है।
विकास और क्षेत्रीय सरोकार
बैकुंठपुर का क्षेत्र भौगोलिक रूप से बाढ़ की समस्याओं से जूझता रहा है। विधायक के रूप में मिथिलेश तिवारी ने यहां बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों और सड़क नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। इसके अलावा, राजापट्टी कोठी मंदिर क्षेत्र जैसे धार्मिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाने का श्रेय भी उन्हें जाता है।
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नई जिम्मेदारी और उम्मीदें
2025 के इस कार्यकाल में मंत्रिमंडल में शामिल होना उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव है। माना जा रहा है कि उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें किसी महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। गोपालगंज जिले से आने वाले इस नेता के सामने अब चुनौती न केवल अपने क्षेत्र का विकास करने की होगी, बल्कि पूरे बिहार में भाजपा के सांगठनिक आधार को और मजबूत करने की भी होगी।