जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री में वर्षों से चली आ रही फाइलों की लंबी प्रक्रिया अब धीरे-धीरे अतीत बनने लगी है। बिहार में लागू ऑनलाइन ई-निबंधन व्यवस्था ने रजिस्ट्री कार्यालयों की कार्यप्रणाली बदलनी शुरू कर दी है। सारण जिले में अभी तक 4,200 से अधिक दस्तावेजों का ऑनलाइन निबंधन हो चुका है। क्रेता-विक्रेता के डिजिटल सत्यापन, अंगूठे के निशान और डिजिटल हस्ताक्षर के बाद प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इससे कागजी औपचारिकताओं और कार्यालय के चक्कर कम करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन डिजिटल बदलाव के साथ रजिस्ट्री कार्यालयों के बाहर वर्षों से काम कर रहे कातिबों और स्टांप वेंडरों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में कातिब और स्टांप वेंडर हड़ताल पर हैं।
4200 से ज्यादा दस्तावेजों का ऑनलाइन निबंधन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अभी तक 4,200 से अधिक दस्तावेज ऑनलाइन निबंधित किए जा चुके हैं। डिजिटल प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच, पक्षकारों का सत्यापन और हस्ताक्षर जैसी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जा रही है। इससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि नई व्यवस्था के नाम पर किसी बिचौलिये या असामाजिक तत्व को आम लोगों को भ्रमित करने का अवसर नहीं मिले। ऑनलाइन रजिस्ट्री को लेकर अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाकर लोगों को गुमराह करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही गई है।
पुराने कार्यालयों की जगह दिखेगा आधुनिक स्वरूप
डिजिटल रजिस्ट्री के साथ सारण के निबंधन कार्यालयों के भवन और नागरिक सुविधाओं को भी आधुनिक बनाने की तैयारी है। भवन निर्माण विभाग को आधुनिक प्राक्कलन तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रस्तावित व्यवस्था में हेल्प डेस्क, व्यवस्थित प्रतीक्षालय, पेयजल और टोकन आधारित सिस्टम जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य रजिस्ट्री कराने आने वाले नागरिकों को बेहतर और व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराना है। वर्षों से अव्यवस्थित दिखने वाले निबंधन कार्यालयों को आधुनिक और पेशेवर स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। हड़ताल करने वाले वेंडरों और कातिबों का कहना है कि वे दशकों से इसी पेशे पर निर्भर हैं। उम्र के इस पड़ाव पर अचानक दूसरा काम शुरू करना उनके लिए आसान नहीं है। उनका सवाल है कि डिजिटल व्यवस्था में उनका भविष्य क्या होगा और वर्षों के अनुभव का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।
राज्य में 1.15 लाख से अधिक दस्तावेज ऑनलाइन
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बिहार में ऑनलाइन ई-निबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक 1.15 लाख से अधिक दस्तावेजों का डिजिटल निबंधन किया जा चुका है। राज्य के 138 से अधिक निबंधन कार्यालयों में यह व्यवस्था लागू है। सारण में भी ऑनलाइन निबंधन की गति तेज है और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिला राज्य में सातवें स्थान पर है। सरकार के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था को सुचारु करना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही बड़ा सवाल उन लोगों के रोजगार का है, जो वर्षों से इसी व्यवस्था से जुड़े हैं।
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हालांकि, प्रशासन के सामने अब चुनौती पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री लागू करने के साथ-साथ इस बदलाव से प्रभावित कातिबों और स्टांप वेंडरों के हितों को लेकर समाधान तलाशने की भी है।
डिजिटल व्यवस्था के बीच रोजगार का सवाल
कातिबों और स्टांप वेंडरों का कहना है कि तकनीक का विरोध उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन उनकी आजीविका अचानक खत्म न हो, इसके लिए सरकार को रास्ता निकालना चाहिए। इस संबंध में कातिबों का कहना है, 'इतने वर्षों से इसी पेशे को अपनाए हुए हैं। अब उम्र ऐसी नहीं है कि कोई दूसरा काम शुरू कर सकें।' ऐसे में डिजिटल रजिस्ट्री के साथ उनके अनुभव का उपयोग करने, नई व्यवस्था में वैकल्पिक भूमिका देने या रोजगार का कोई रास्ता निकालने की मांग भी सामने आ रही है। यानी रजिस्ट्री कार्यालयों में बदलाव की यह कहानी केवल फाइलों से डिजिटल स्क्रीन तक पहुंचने की नहीं, बल्कि तकनीक के इस संक्रमण में वर्षों से जुड़े लोगों की आजीविका और भविष्य से भी जुड़ी हुई है।