समस्तीपुर में बीते 15 दिन से नौ सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल कर रही आशा कार्यकर्ताओं का अमानवीय चेहरा सामने आया है। प्रसव पीड़ा झेल रही एक महिला को पीएचसी के प्रसव कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया, जिसका नतीजा हुआ कि महिला ने प्रसव कक्ष के गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, मामला विभूतिपुर पीएचसी का है।
बताया गया है कि विभूतिपुर प्रखंड के टभका पश्चिमी टोल के चंदनदास की पत्नी कोमल कुमारी को रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़ा महसूस हुई। परिवार के लोग कोमल को लेकर विभूतिपुर पीएचसी पहुंचे, लेकिन विभूतिपुर पीएचसी में आंदोलनकारी आशा कार्यकर्ता जमी हुई थी। आशा कार्यकर्ताओं ने प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को पीएचसी में प्रवेश करने से रोका। हालांकि, वह मुख्य गेट से प्रवेश कर अंदर तो चली गई। लेकिन प्रसव कक्ष के पास फिर महिलाओं ने उसे रोक दिया। फलस्वरुप प्रसव पीड़ा से परेशान कोमल वहीं पर गिर पड़ी और कुछ देर में प्रसव कक्ष के गेट पर ही उसने बच्चे को जन्म दिया।
इस दौरान कुछ लोगों द्वारा इस घटना का वीडियो भी बना लिया गया। जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद अस्पताल के कर्मियों ने महिला का सहयोग कर तत्काल उपचार के लिए पहुंचाया। बताया गया कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं और उन्हें घर के लिए रवाना कर दिया गया है।
आशा कार्यकर्ताओं के इस व्यवहार की हो रही है निंदा
विभूतिपुर पीएससी में बुधवार रात आशा कार्यकर्ताओं के इस व्यवहार का चहुंओर निंदा की जा रही है। उधर, सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी ने बताया कि किसी भी स्थिति में इमरजेंसी मरीज को नहीं रोका जा सकता है। इस मामले में शिकायत मिलने पर संबंधित आशा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की जाएगी। विभूतिपुर पीएससी में घटी इस घटना का वीडियो अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह प्रसव पीड़ा झेल रही महिला ने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म दिया है।
नौ सूत्री मांगों को लेकर 15 दिनों से स्ट्राइक पर हैं आशा कार्यकर्ता
आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करने और कम से कम 18 हजार रुपये वेतन निर्धारित करने समेत नौ सूत्री मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ता गत 15 दिनों से हड़ताल पर हैं। विभिन्न अस्पतालों में आशा कार्यकर्ता प्रसव कार्य को प्रभावित कर रही हैं। प्रसव कार्य प्रभावित करने के उद्देश्य से आशाओं की टीम अलग-अलग शिफ्ट में प्रसव कक्ष के पास धरना देती हैं।